मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ा ईंधन महंगा होने का खतरा
कच्चे तेल में उछाल से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी पर बढ़ा दबाव, भारत के पास 60 दिन का तेल भंडार
नई दिल्ली, 14 जुलाई। मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इससे भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत की तेजी के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। मर्बन क्रूड की कीमतों में भी 5.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
महंगाई पर पड़ सकता है असर
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन लागत और ईंधन कीमतों पर पड़ता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में प्रत्येक एक डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर 50 से 60 पैसे प्रति लीटर तक का दबाव बन सकता है। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि अंतिम खुदरा कीमतें कर, विनिमय दर और सरकारी नीतियों सहित कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं।
हाल के महीनों में बढ़ चुके हैं दाम
देश में 7 जून 2026 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की वृद्धि की गई थी। इससे पहले 7 मार्च को भी सिलेंडर 60 रुपये महंगा हुआ था। वहीं मई और जून के दौरान पेट्रोल की कीमतों में भी करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
भारत की तैयारी कितनी मजबूत?
सरकार का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता लाई है। अब भारत रूस, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, नाइजीरिया और कुवैत सहित करीब 40 देशों से तेल खरीदता है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार देश के लगभग 70 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात ऐसे मार्गों से भी संभव है, जो पूरी तरह होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं हैं।
60 दिन का तेल भंडार उपलब्ध
आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत ने विशाखापट्टनम, मंगलूरु और पादुर में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) विकसित किए हैं। ये भंडार लगभग 9.5 दिन तक कच्चे तेल की जरूरत पूरी कर सकते हैं। इसके अलावा रिफाइनरियों और तेल विपणन कंपनियों के वाणिज्यिक भंडार को मिलाकर देश के पास करीब 60 दिन की तेल आवश्यकता पूरी करने लायक स्टॉक उपलब्ध है। ऐसे में यदि वैश्विक आपूर्ति कुछ समय के लिए प्रभावित भी होती है, तो तत्काल ईंधन संकट की आशंका अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है।


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