भाकियू (अराजनैतिक) का जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन
‘भारत एनपीके’ नाम से उर्वरक बेचकर किसानों को गुमराह करने का आरोप, जांच और बिक्री पर रोक की मांग
मेरठ। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने किसानों से जुड़े उर्वरक के मुद्दे को लेकर गुरुवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष कालूराम प्रधान के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर बाजार में एक उर्वरक की कथित भ्रामक नाम से बिक्री पर आपत्ति जताई। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि इससे किसान भ्रमित होकर गलत उर्वरक खरीद रहे हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ज्ञापन में संगठन ने आरोप लगाया कि हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के अमोनियम सल्फेट उर्वरक को ‘भारत एनपीके’ नाम से बाजार में बेचा जा रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि इस नाम के कारण कई किसान इसे वास्तविक एनपीके उर्वरक समझकर खरीद रहे हैं, जबकि अमोनियम सल्फेट में एनपीके उर्वरक के समान पोषक तत्व उपलब्ध नहीं होते।
संगठन के अनुसार, भ्रामक नाम के चलते किसान फसलों के लिए आवश्यक फास्फोरस और पोटाश की पर्याप्त मात्रा की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। इससे फसल की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। किसान नेताओं ने इसे किसानों के साथ धोखा बताते हुए प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
भाकियू (अराजनैतिक) ने ज्ञापन के माध्यम से उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। संगठन ने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों और संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
किसान नेताओं ने यह भी मांग की कि जांच पूरी होने तक कथित भ्रामक नाम से बेचे जा रहे उर्वरक की बिक्री पर रोक लगाई जाए, ताकि किसान भ्रमित होकर आर्थिक नुकसान का शिकार न हों।
जिला अध्यक्ष कालूराम प्रधान ने कहा कि किसान पहले से ही बढ़ती लागत, मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितताओं से परेशान हैं। ऐसे में उर्वरक के नाम और गुणवत्ता को लेकर भ्रम की स्थिति किसानों की आय और फसल उत्पादन पर सीधा असर डाल सकती है। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठन का संघर्ष जारी रहेगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश प्रभारी युवा मिराज सिवाया, नीरज राठी, पवन कॉल, अमित छाबड़िया समेत संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।


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