जेल से रिहा होते ही रवि गौतम का ऐलान, एसएसपी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे कानूनी लड़ाई
कचहरी में समर्थकों के बीच बोले- मारपीट और अपमान का जवाब अदालत में देंगे, बर्खास्तगी की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी
मेरठ। कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन और जाम लगाने के मामले में गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए दलित अधिवक्ता रवि गौतम शुक्रवार को जमानत पर रिहा होने के बाद मेरठ पहुंचे। कचहरी चौराहे पर डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद उन्होंने पुलिस प्रशासन, विशेषकर एसएसपी अविनाश पांडेय के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि उनके साथ हुई कथित मारपीट और अपमान का जवाब अब अदालत में दिया जाएगा। उन्होंने एसएसपी के खिलाफ कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने और उनकी बर्खास्तगी की मांग को लेकर आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया। उनके साथ जेल भेजे गए पांच अन्य लोगों को भी शुक्रवार को रिहा कर दिया गया।
कचहरी परिसर में रवि गौतम के पहुंचने पर दलित समाज के अधिवक्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सपा नेता हिमांशु सिद्धार्थ भी मौजूद रहे। मीडिया से बातचीत में रवि गौतम ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान उनके साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट की गई और बाद में एसएसपी कार्यालय तथा पुलिस हिरासत में भी उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने दावा किया कि उन्हें रातभर सिविल लाइन थाने में न तो खाना दिया गया और न ही सोने दिया गया। उनका आरोप है कि अगले दिन उन्हें दूसरे जिले की जेल में इस तरह भेजा गया, जैसे वह कोई बड़ा अपराधी हों।
रवि गौतम ने कहा कि आठ जुलाई को वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनका कहना था कि डीएम और एसएसपी स्वयं बाहर आकर ज्ञापन लें और पीड़ित परिवार की बात सुनें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने एसपी देहात अभिजीत कुमार पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने लंबे समय तक पीड़ित पक्ष को गुमराह किया और जिस पुलिसकर्मी को निर्दोष बताया जा रहा था, बाद में उसी को जेल भेजना पड़ा।
एसएसपी पर लगाए गंभीर आरोप
एसएसपी अविनाश पांडेय पर निशाना साधते हुए रवि गौतम ने आरोप लगाया कि उनका रवैया तानाशाही वाला है। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम पीड़ित को न्याय दिलाना है, लेकिन दलित समाज की आवाज उठाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें केवल दलित होने के कारण निशाना बनाया गया और अपमानित किया गया। उन्होंने कहा कि आंदोलन में लाठी खाना अलग बात है, लेकिन किसी अधिकारी द्वारा व्यक्तिगत रूप से मारपीट करना कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रवि गौतम ने पुलिस पर निर्दोष लोगों को भी मुकदमों में फंसाने का आरोप लगाया। उन्होंने दिग्विजय भाटी को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह आंदोलन में शामिल तक नहीं थे, इसके बावजूद उन्हें जेल भेज दिया गया। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों का जिक्र करते हुए कहा कि उन पर कुल तीन मुकदमे हैं, जिनमें एक मेरठ और दो गाजियाबाद के हैं तथा सभी सामाजिक संघर्षों से जुड़े हैं।
एसएसपी की बर्खास्तगी की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी
जेल में बिताए समय का जिक्र करते हुए रवि गौतम ने आरोप लगाया कि वहां भी उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि वह अपने सम्मान और समाज के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में एसएसपी की बर्खास्तगी की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या दलितों को इसलिए पीटा गया क्योंकि वे ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर नहीं आए थे। उनके बयान के बाद समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी की।


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