सेंट्रल मार्केट प्रकरण: शास्त्री नगर की ‘गूंज’ से गूंजेगा अब पूरा शहर!

21 सितंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें, सुप्रीम कोर्ट करेगा शहर के अन्य इलाकों की समीक्षा

मेरठ। शास्त्री नगर के सेंट्रल मार्केट प्रकरण की गूंज अब पूरे शहर में सुनाई देने लगी है। 30 अगस्त 1986 को वीर सिंह को आवंटित किए गए आवासीय भूखंड संख्या 661/6 से शुरू हुआ विवाद अब शहर के अन्य आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों तक पहुंच गया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण संकेत दिए।

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट (शास्त्री नगर) मामले में व्यापारियों को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। व्यापारियों की ओर से अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने नई उपविधि के तहत कंपाउंडिंग फीस जमा कर व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखने की अनुमति देने की मांग रखी थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल शास्त्री नगर ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य आवासीय क्षेत्रों में भी आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक उपयोग की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। कोर्ट ने संकेत दिया कि आगामी 21 सितंबर को होने वाली सुनवाई में शास्त्री नगर मामले की अनुपालन रिपोर्ट के साथ-साथ शहर और बाहरी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित रिपोर्ट पर भी विचार किया जाएगा।

कोर्ट के इस रुख के बाद कंकरखेड़ा, पल्लवपुरम, गंगानगर सहित बाहरी कॉलोनियों में आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों की चिंता बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, इन क्षेत्रों में भी अब प्रशासनिक कार्रवाई की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अधिवक्ताओं के अनुसार, दिल्ली के मालवीय नगर और लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांडों का भी असर कंपाउंडिंग से जुड़े मामलों पर पड़ा है। सुरक्षा मानकों और नियमों के उल्लंघन को लेकर कोर्ट का रुख सख्त दिखाई दे रहा है।

अब शहर के व्यापारियों, आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों और आम लोगों की नजरें 21 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिक गई हैं। इस दिन सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा से शहर के कई इलाकों के भविष्य की तस्वीर साफ हो सकती है।

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