ऑपरेशन 'साइ-वज्र' : मेरठ रेंज में पांच दिन में 77 मुकदमे, 65 साइबर अपराधी गिरफ्तार

मेरठ। साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन 'साइ-वज्र' के तहत मेरठ रेंज पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच दिनों में 435 शिकायतों का निस्तारण किया, 77 मुकदमे दर्ज किए और 65 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। गैंगस्टर एक्ट के तहत एक आरोपी की करीब तीन करोड़ रुपये की संपत्ति भी कुर्क की गई।

सोमवार को मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी ने भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर साइबर अपराधों की रोकथाम, पुलिस और दूरसंचार विभाग के बीच समन्वय तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान पर चर्चा की। बैठक में भारतीय दूरसंचार सेवा के वरिष्ठ अधिकारी आदित्य सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

डीआईजी ने बताया कि ऑपरेशन 'साइ-वज्र' के तहत फर्जी कॉल सेंटर संचालकों एवं साइबर ठगी में संलिप्त अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि पुराने साइबर अपराधियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर उनकी अवैध संपत्तियां भी कुर्क की जाएं। हाल ही में एक साइबर अपराधी की लगभग तीन करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई है। इसके अलावा साइबर ठगी की रकम बैंक खातों में प्राप्त कर चेक के माध्यम से निकालने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से पांच लाख रुपये बरामद किए गए हैं।

अभियान के दौरान चेक विदड्रॉल, एटीएम कैश आउट, म्यूल अकाउंट, संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन और सिम बॉक्स से जुड़े मामलों में भी व्यापक कार्रवाई की गई। जनपदवार कार्रवाई में मेरठ में 75 शिकायतों का निस्तारण करते हुए 26 मुकदमे दर्ज किए गए और 36 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बुलंदशहर में 298 शिकायतों का निस्तारण, 47 मुकदमे और 19 गिरफ्तारियां हुईं। बागपत में 24 मामलों में दो मुकदमे दर्ज कर नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि हापुड़ में 38 शिकायतों के निस्तारण के साथ दो मुकदमे दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

बैठक में दूरसंचार विभाग द्वारा विकसित संचार साथी, सीईआईआर, समन्वय पोर्टल और प्रतिबिंब पोर्टल की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से साइबर अपराधों की रोकथाम में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। डीआईजी ने सभी जिलों को निर्देश दिए कि दूरसंचार विभाग से प्राप्त प्रत्येक पत्र पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

दूरसंचार विभाग ने बताया कि टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी (संशोधन) नियम-2025 के तहत सुरक्षित मोबाइल नंबर वैलिडेशन (एमएनवी) प्लेटफॉर्म लागू किया गया है। इसके अलावा संचार साथी पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से नागरिक अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, खोए या चोरी हुए मोबाइल को ब्लॉक करा सकते हैं तथा 'चक्षु' सुविधा के जरिए बैंक केवाईसी फ्रॉड, फर्जी कॉल, संदिग्ध एसएमएस और व्हाट्सएप संदेशों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। साथ ही सेकेंड हैंड मोबाइल की बिक्री से पहले आईएमईआई सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की गई है, जिससे साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल उपकरणों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

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