करनाल साहित्य उत्सव में 37 साहित्यकार सम्मानित, पांच पुस्तकों का हुआ विमोचन
करनाल। सांझा साहित्य मंच के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय करनाल साहित्य उत्सव में हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के 37 साहित्यकारों को स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में आयोजित युवा कवि सम्मेलन में युवा रचनाकारों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता नवचेतना मंच के अध्यक्ष एस.पी. चौहान ने की। उन्होंने साहित्यकारों से सच लिखने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि एवं दिल्ली आकाशवाणी के उद्घोषक ऋषि कुमार शर्मा ने कहा कि साहित्य समाज की आवाज होता है और लेखक की रचना में परिवर्तन लाने की शक्ति होनी चाहिए।
मंच के अध्यक्ष कृष्ण कुमार निर्माण और महासचिव सतविंदर राणा ने बताया कि साहित्य उत्सव में सर्वसम्मति से पांच प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें हरियाणवी को भाषा का दर्जा देने, धार्मिक अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों पर हमले रोकने, महिलाओं के विरुद्ध बढ़ती यौन हिंसा पर रोक लगाने तथा साहित्य के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए आवश्यक कदम उठाने की मांग शामिल रही।
कार्यक्रम के दौरान रोजलीन की 'शब्द आकाश हो गए', अनिल पृथ्वीपुत्र की 'बात मर्म की', मदन शेखपुरी की 'आसमान हम ही छू नहीं पाए', कृष्ण कुमार निर्माण की 'घणा बदलग्गा यार जमाना' तथा जसप्रीत फलक की 'ग़ज़ल मेरे जाविए' सहित पांच पुस्तकों का विमोचन किया गया। यूनिक प्रकाशन और जनचेतना मंच की ओर से पुस्तक मेले का भी आयोजन किया गया।
काव्य पाठ सत्र में गुरविंदर, गुरुमुख वड़ैच, डॉ. कांता वर्मा, संगीता शर्मा, डॉ. राजपाल, डॉ. विराज धीमान, दीपक वोहरा, डॉ. रीटा, सुषमा चोपड़ा, लाभ सिंह आर्य और नरेंद्र राणा सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में डॉ. अशोक भाटिया और आचार्य महाबीर प्रसाद शास्त्री ने आशीर्वचन दिए। इस अवसर पर डॉ. दलीप खरेरा को पीएचडी की उपाधि प्राप्त होने पर सम्मानित भी किया गया।


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