संत समाज हमेशा जोड़ने का काम करता है- रविन्द्रपुरी महाराज 

सामाजिक समरसता में गोरक्षपीट की भूमिका पर राष्ट्रीय विचार गोष्ठी का आयोजन 

मेरठ। सीसीएसयू  के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में रविवार को "सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका" विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में संतों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भाग लेकर सामाजिक एकता और समरसता पर अपने विचार साझा किए।संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में आपसी भाईचारा, समानता और सौहार्द का भाव बढ़ाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ ने वर्षों से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का कार्य किया है।

 संगाेष्ठी में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि संत समाज सदैव लोगों को जोड़ने और समाज में सकारात्मक संदेश देने का कार्य करता आया है। वहीं स्वामी दीपांकर महाराज ने लोगों से जाति, वर्ग और अन्य भेदभावों को छोड़कर राष्ट्रहित में एकजुट होने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम सिंह ने कहा कि सामाजिक समरसता के बिना मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

कार्यक्रम में गोरक्षपीठ की परंपरा तथा राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ और महंत दिग्विजयनाथ के सामाजिक योगदान पर भी विस्तार से चर्चा की गई। ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि समरसता संवाद समाज को जोड़ने का एक व्यापक अभियान है, जिसे प्रदेश के विभिन्न जिलों में अच्छा समर्थन मिल रहा है।संगोष्ठी के दौरान शिक्षा, समाज सेवा, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 25 लोगों को "समरसता सम्मान" से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।

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