मेरठ की सड़कों पर जल्द दौड़ेंगी नई एसी ई-बसें
मेरठ के यात्रियों को मिलेगी आधुनिक परिवहन सुविधा
12 वर्षों तक निजी ऑपरेटर संभालेंगे संचालन और रखरखाव
ई-बसों से प्रदूषण घटेगा, सफर होगा अधिक आरामदायक
मेरठ। महानगर के यात्रियों को जल्द ही आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की सौगात मिलने जा रही है। प्रदेश सरकार ने ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (GCC) मॉडल के तहत मेरठ समेत 18 शहरों में 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को मंजूरी दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना से शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलने के साथ यात्रियों को बेहतर यात्रा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
मेरठ में लगातार बढ़ते शहरीकरण और निजी वाहनों की संख्या के कारण यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में नई ई-बसों का संचालन शहरवासियों के लिए राहत लेकर आएगा। यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और किफायती यात्रा का विकल्प मिलेगा, वहीं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
नगर विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत नगरीय परिवहन निदेशालय वर्तमान में प्रदेश के 15 नगर निगम क्षेत्रों में 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कर रहा है। इनमें से 700 बसें पहले से ही जीसीसी मॉडल पर संचालित हैं। अब सरकार ने इस मॉडल का विस्तार करते हुए मेरठ सहित 18 शहरों में 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1725 नई एसी ई-बसें संचालित करने का निर्णय लिया है।
योजना के तहत निजी ऑपरेटर बसों की खरीद, चार्जिंग स्टेशन की स्थापना, चालकों एवं तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था, संचालन तथा अनुरक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे। ऑपरेटरों का चयन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। सरकार द्वारा निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर उन्हें संचालन एवं अनुरक्षण शुल्क का भुगतान किया जाएगा। अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन तिथि से 12 वर्ष होगी।
40 लाख तक मिलेगा अनुदान
परियोजना को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार ने 12 मीटर लंबी ई-बस पर 40 लाख रुपये तथा 9 मीटर लंबी ई-बस पर 35 लाख रुपये प्रति बस अनुदान देने का फैसला किया है। डिपो निर्माण के लिए आवश्यक भूमि संबंधित नगर निगमों द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि बस किराया और अन्य प्रयोक्ता शुल्क का निर्धारण राज्य सरकार करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार निजी निवेश आधारित यह मॉडल सरकारी खर्च का बोझ कम करने के साथ-साथ परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा। प्रतिस्पर्धा के चलते निजी ऑपरेटर यात्रियों को बेहतर सेवाएं, समयबद्ध संचालन और आधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित होंगे।
शहर में ई-बसों के विस्तार को सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। योजना के धरातल पर उतरने के बाद हजारों यात्रियों को जाम, प्रदूषण और असुविधाजनक यात्रा से राहत मिलने की उम्मीद है।
: योजना की प्रमुख बातें*
* मेरठ समेत 18 शहरों में 1725 नई एसी ई-बसें संचालित होंगी।
* 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की बसें शामिल होंगी।
* निजी ऑपरेटर 12 वर्षों तक संचालन और रखरखाव करेंगे।
* 12 मीटर बस पर ₹40 लाख तथा 9 मीटर बस पर ₹35 लाख अनुदान मिलेगा।
* डिपो निर्माण के लिए नगर निगम निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराएंगे।
* बसों का किराया राज्य सरकार तय करेगी।
* प्रदूषण नियंत्रण और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा।


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