नई सड़कों, आबादी के पास जमीन होगी महंगी,20-50% अतिरिक्त स्टांप शुल्क देना होगा

15 दिन में भूखंडों को चिह्नित करने का निर्देश
मेरठ। शहर, कस्बे और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास कार्य, बन रही नई-नई सड़कें तथा तेजी से बढ़ रहा आबादी क्षेत्र आम जनता की जेब पर भारी पड़ने वाला है। निबंधन विभाग ने इन नए मार्गों तथा नए आबादी क्षेत्रों की 200 मीटर की त्रिज्या में स्थित सभी प्रकार की भूमि को चिन्हित कर उन्हें सर्किल रेट की सूची में शामिल करने की तैयारी की है।
इन चिन्हित क्षेत्रों में बैनामा कराने पर 20 से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त स्टांप शुल्क देना होता है। शासन के आदेश पर जिलाधिकारी ने सभी एसडीएम, तहसीलदार और निबंधन अफसरों को ऐसी भूमि के गाटा संख्या को चिह्नित करके उन्हें 15 दिन में निबंधन विभाग के प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज करने का निर्देश दिया है।

जनपद में कई वर्षों के अंतराल के बाद एक अगस्त 2025 से संपत्तियों के सर्किल रेट संशोधित करके लागू किए गए थे। इसके बाद आईजी निबंधन नेहा शर्मा ने 19 जनवरी को मेरठ जिला प्रशासन को विभिन्न मार्गों के किनारे तथा नए आबादी क्षेत्रों के आसपास 200 मीटर की त्रिज्या में स्थित कृषि व अन्य भूमि के खसरा संख्या चिह्नित करके उन्हें सर्किल रेट की सूची में शामिल करने का आदेश दिया था।तहसील प्रशासन को खसरा नंबरों को चिन्हित करके उनका विवरण निबंधन विभाग को उपलब्ध कराना था।जिन्हें निबंधन विभाग अपने प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज करेगा। लेकिन तहसील ने यह कार्य नहीं किया।इस स्थिति पर रोष जताते हुए आईजी निबंधन ने 8 मई को जिला प्रशासन को पत्र भेजा। जिस पर जिलाधिकारी ने सभी एसडीएम और तहसीलदार को चेताया था।आइजी निबंधन ने जिला प्रशासन से 15 जून तक रिपोर्ट मांगी है।जिस पर जिलाधिकारी ने 30 मई को एडीएम वित्त, एआइजी निबंधन, सभी एसडीएम, सभी उप निबंधकों और तहसीलदार के साथ बैठक की।आइजी निबंधन के पत्र के मुताबिक जनपद में भूलेख पोर्टल पर भूमि के 6,27,119 गाटा संख्या दर्ज हैं लेकिन प्रेरणा पोर्टल पर जनवरी से 30 अप्रैल तक इनमें से मात्र 85,585 गाटा संख्या को ही दर्ज किया जा सका है।
डीएम ने बैठक में 15 दिन में तहसील को ऐसी भूमि के गाटा संख्या उपलब्ध कराने तथा निबंधन अफसरों को इन्हें तत्काल प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज करने का निर्देश दिया।एडीएम वित्त को उन्होंने इस कार्य की रोजाना समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी है।एसडीएम को उन्होंने लेखपाल की रिपोर्ट का मौके पर पहुंचकर सत्यापन करने का निर्देश दिया है।

सर्किल रेट में वृद्धि का भी आया समय
नियमानुसार प्रत्येक वर्ष एक अगस्त से संशोधित सर्किल रेट को लागू किया जाता है लेकिन मेरठ में विभिन्न प्रोजेक्ट के लिए भूमि का अधिग्रहण कार्य चल रहा था जिसके चलते यहां कई वर्ष तक सर्किल रेट संशोधित नहीं किए गए।वर्ष 2025 में शासन के आदेश पर जिला प्रशासन ने सर्किल रेट को संशोधित करके लागू किया था।
इसके बाद जनवरी में फिर से सड़क किनारे और आबादी के नजदीक की भूमि को चिह्नित करने का आदेश दे दिया था।हालांकि उसपर काम अब शुरू हो सकेगा।जबकि अब एक बार फिर से सर्किल रेट को संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू करने का समय आ गया है।
विभाग को मिलता है 20 से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त स्टांप शुल्क
स्टांप एक्ट के मुताबिक लिंक मार्ग, जिला मार्ग तथा राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गो पर स्थित आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक भूमि के सर्किल रेट अलग से निर्धारित किए जाते हैं। इन मार्गों पर ही स्थित कृषक भूमि की रजिस्ट्री में भी 20 से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त स्टांप शुल्क देना होता है।गांवों, कसबों और शहरों में आबादी से 200 मीटर की त्रिज्या में स्थित कृषक भूमि पर 30 प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क अदा करना होता है।

इन बिंदुओं पर होगा सर्वे
-हाईवे, जिला मार्ग तथा लिंक मार्ग से सटे खसरा नंबर।
-नव विकसित आबादी क्षेत्र से 200 मीटर की त्रिज्या में स्थित खसरा नंबर।
-ऐसे खसरा नंबर जो न तो किसी मार्ग पर स्थित हैं और न ही उनके 200 मीटर दूर तक कोई आबादी अथवा निर्माण है।

अतिरिक्त स्टांप शुल्क का नियम
20 प्रतिशत-----लिंक मार्ग पर स्थित कृषक भूमि
30 प्रतिशत-----जिला मार्ग पर स्थित कृषक भूमि
50 प्रतिशत-----राज्य और राष्ट्रीय मार्ग पर स्थित कृषक भूमि
30 प्रतिशत-----आबादी से 200 मीटर की त्रिज्या में स्थित कृषक भूमि
अतिरिक्त स्टांप शुल्क वसूलने का प्रविधान है
विभिन्न मार्गों से सटे तथा आबादी की 200 मीटर की त्रिज्या में अतिरिक्त स्टांप शुल्क वसूलने का प्राविधान है।ऐसी भूमि को चिह्नित करके निबंधन विभाग के प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज किया जाता है ताकि रजिस्ट्री के समय खसरा नंबर डालते ही उसकी स्थिति स्पष्ट हो जाए। सभी को निर्देशित किया गया है। जल्द यह लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।

-डा. वी के सिंह, जिलाधिकारी

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