वेंक्टेश्वरा में ’योगा फाॅर मेन्टल एण्ड फिजिकल वेल बीईंग’’ विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
- भारत विश्व का सबसे युवा देश, आज युवाशक्ति, योग एवं आध्यात्म के बल पर फिर से दुनिया का सिरमौर बनने चला भारत- सुधीर गिरि, संस्थापक अध्यक्ष, वेंक्टेश्वरा समूह
- योग भारत की ऋषियों/मुनियों के समय से सबसे प्राचीन विरासत, आईये योग एवं आध्यात्म के दम पर भारत को ’’स्वस्थ भारत-आरोग्य भारत’’ के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में स्थापित करने की ओर बढ़े- डाॅ. राजीव त्यागी, प्रतिकुलाधिपति
- योग कोई आसन मात्र या व्यायाम क्रिया ही नहीं, बल्कि योग (एडीशन/जोड) का मतलब शरीर का आत्मा के साथ ’’आत्मसात होना है’’- प्रो. (डाॅ.) जी.एस रनधावा, विख्यात चिकित्सक मुम्बई/नोएडा।
- मानसिक स्वास्थय, तनावमुक्ति एवं भावनात्मक नियंत्रण (इमोशनल कंट्रोल) में योग एवं आध्यात्म का सबसे अधिक महत्व- प्रो0 (डाॅ.) सुरेश जी मेहता, विख्यात मनोरोग चिकित्सक एवं विभागाध्यक्ष, मनोरोग विभाग, महर्षि मार्कंडेश्वर मेडिकल काॅलेज, अम्बाला।
- योगा के सिद्धान्त जीवन के ’’ओवरआॅल बैलेन्स’’ एवं आन्तरिक सामंजस्य/शान्ति का मुख्य स्तम्भ- आचार्य स्वामी दीपक ज,
मेरठ । राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंक्टेश्वरा संस्थान के मनोचिकित्सा एवं सामुदायिक चिकित्सा विभाग के संयुक्त तत्वांधान में ’’योगा फाॅर मेन्टल एण्ड फिजिकल वेल बीईंग’’ विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शानदार आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से पधारे एक दर्जन से अधिक विख्यात चिकित्सकों, योगाचार्यो, मनोचिकित्सको आदि ने उपस्थित स्टाॅफ एवं मेडिकल छात्र-छात्राओं को ’’स्वस्थ जीवन में योग के महत्व’’ को विस्तार से इंगित करते हुए ’’शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थय के लिए योग को सबसे महत्वपूर्ण स्तम्भ करार देते हुए भारत को फिर से दुनिया का सिरमौर बनाने में योग की भूमिका को सर्वोच्च करार दिया।
डाॅ. सी.वी. रमन सभागार में मनोरोग एवं सामुदायिक चिकित्सा विभाग के संयुक्त तत्वांधान में आयोजित ’’योगा फाॅर मेन्टल एण्ड फिजिकल वेल बीईंग’’ विषय पर आधारित एकदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ संस्थापक अध्यक्ष सुधीर गिरि, प्रतिकुलाधिपति डाॅ. राजीव त्यागी, कुलपति प्रो. कृष्ण कान्त दवे, मुम्बई से आये प्रो. जी.एस. रंधावा, विख्यात मनोचिकित्सक अम्बाला से प्रो. (डाॅ.) सुरेश मेहता, अन्तर्राष्ट्रीय पंतजलि योगपीठ से आचार्य दीपक, डीन डाॅ. प्रभु एम.एच., एम.एस. डाॅ. शिशिर पाटिल, डाॅ. संदीप चैधरी, डाॅ. आलोक कुमार आदि ने सरस्वती माँ की प्रतिमा कके सन्मुख दीप प्रज्जवलित करके किया।
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अपने सम्बोधन में मुम्बई से आये विख्यात चिकित्सक प्रो. जी.एस. रंधावा ने कहा कि आज मार्डन लाईफ स्टाईल में जहां प्रत्येक व्यक्ति, तनाव, दुख, बिमारियों एवं अशान्ति से जूझ रहा है, वहा पर संतुलित खान-पान, सही दिनचर्या के साथ-2 योग एवं आध्यात्म का रोल सबसे अहम हो जाता है। यदि हम योग व आध्यात्म के बल पर स्वयं को स्वस्थ रखते हुए ’’स्वस्थ भारत-आरोग्य भारत’’ के सपने को सच करने में अपना प्रभावी योगदान देते है, तो जल्द ही भारत फिर से दुनिया का सिरमौर होगा।
एकदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को आर्गेनाईजिंग कमेटी के अध्यक्ष डाॅ. संदीप चैधरी, डाॅ. सुशील कुमार, डाॅ. विवेक पाठक, डाॅ. अमित जैन आदि ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर डाॅ. रामकृष्णन, डाॅ. विवेक, डाॅ. कीर्ति कंवर, डाॅ. उदित, डाॅ. गजल गुप्ता, डाॅ. दिव्यजीत, डाॅ. रविन्द्र, डाॅ. सौरभ सिंह, डाॅ. अलंकृता सिंह, डाॅ. छत्रजीत सिंह, डाॅ. मंयक राज, डाॅ. अनमोल अनेजा, डाॅ. श्रेया शर्मा, डाॅ. अंजलि, डाॅ. संचारी घोष, डाॅ. मिताली, डाॅ. ममता, डाॅ. अपर्णा सिंह, डाॅ. यश पाटिल, मेरठ परिसर से डाॅ. पंकज चैाधरी एवं मीडिया प्रभारी विश्वास राणा आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यशाला का शानदार संचालन डाॅ. कीर्ति कंवर, डाॅ. विदिशा, डाॅ. ममता एवं डाॅ. दीक्षा ने संयुक्त रूप से किया।




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