नवजात के लिए जन्म के तुंरत बाद गोल्डन मिनट में अपनाई जानी वाली चिकित्सीय कार्यशैली महत्वपूर्ण - डा. अमित
एनआरपी दिवस पर मेडिकल कॉलेज में 40 डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ को दिया गया प्रशिक्षण
मेरठ। मेडिकल कॉलेज मेरठ के बाल रोग विभाग द्वारा एनआरपी (Neonatal Resuscitation Program) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें 40 डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ ने प्रतिभाग किया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य नवजात शिशुओं के जन्म के तुरंत बाद “गोल्डेन मिनट” के दौरान अपनाई जाने वाली आवश्यक चिकित्सीय कार्यशैली के बारे में डॉक्टरों को प्रशिक्षित करना था,जिससे नवजात शिशु मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सके। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एनएनएफ इंडिया के तत्वावधान में मेडिकल कॉलेज मेरठ के सेमिनार हॉल में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का संचालन एवं पर्यवेक्षण एनएनएफ इंडियाके सचिव डॉ. अमित उपाध्याय की देखरेख में किया गया। वहीं प्रशिक्षण को डॉ. तूबा कमर सहायक आचार्य, बाल रोग विभाग, द्वारा सफलतापूर्वक पूर्ण कराया गया।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ अनुपमा वर्मा ने बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से डॉक्टरों को यह सिखाया गया कि जन्म के पहले ही मिनट में नवजात शिशु को किस प्रकार सुरक्षित एवं स्वस्थ रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की ट्रेनिंग नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और मृत्यु दर में कमी लाने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।कार्यक्रम में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आएशा सैफी, डॉ शिवम शर्मा व डॉ देवांश यादव सहित अन्य चिकित्सक भी उपस्थित रहे।
डा. अमित ने बताया वर्तमान में नवजात शिशु की मृत्यु दर 20 से 25 के बीच है। सरकार का प्रयास है इस दर को कम से किया जाए । उन्होंने बताया चिकित्सकों को प्रयास है अगले तीन साल में इसकी दर 5 से 8 तक लाया जा सके। जिससे मृत्यु दर को राेकने के काफी अच्छी पहल होगी।


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