मिट्टी के बर्तनों में तकनीक का नया दौर
एमआईईटी के नवाचारियों ने बनाया सौर ऊर्जा से चलने वाला स्मार्ट कुम्हार चाक
मेरठ। परंपरागत मिट्टी कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए अटल कम्युनिटी इन्नोवेशन सेंटर एमआईईटी मेरठ फाउंडेशन के ग्रासरूट नवाचारियों गंगाराम चौहान और राममिलन ने सौर ऊर्जा से चलने वाला गति-नियंत्रित कुम्हार चाक विकसित किया है। यह नवाचार ग्रामीण कुम्हारों के लिए राहत और आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बनकर सामने आया है।
गोरखपुर निवासी 56 वर्षीय गंगाराम चौहान आठवीं पास हैं, जबकि 66 वर्षीय राममिलन पांचवीं तक शिक्षित हैं। सीमित शिक्षा के बावजूद दोनों लगातार ऐसे नवाचार कर रहे हैं, जो आम लोगों के दैनिक जीवन को आसान और सुरक्षित बना सकें। अब उन्होंने पारंपरिक कुम्हार चाक को आधुनिक सौर तकनीक से जोड़कर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो बिना बिजली और ईंधन के पूरे दिन कार्य कर सकता है। मशीन की बनाने का खर्चा मात्र 5 हजार रुपए आया।
इस नवाचार में 24 वाट का सौर पैनल, 24 वाट की डीसी मोटर, मजबूत धातु फ्रेम, पुली प्रणाली और गति नियंत्रण व्यवस्था का उपयोग किया गया है। यह चाक सुबह से शाम तक लगातार सौर ऊर्जा से संचालित होता है। इसकी विशेषता यह है कि कुम्हार अपनी आवश्यकता के अनुसार चाक की गति को नियंत्रित कर सकता है, जिससे छोटे-बड़े और अलग-अलग आकार के मिट्टी के बर्तन अधिक सटीकता और आसानी से बनाए जा सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बिजली की अनियमित आपूर्ति और बढ़ती लागत कारीगरों के लिए बड़ी समस्या बनती है। पारंपरिक पैरों से चलने वाले चाक अधिक मेहनत मांगते हैं, जिससे वृद्ध कारीगर जल्दी थक जाते हैं। ऐसे में यह सौर ऊर्जा चालित चाक कारीगरों के श्रम को कम करने के साथ-साथ उत्पादन क्षमता भी बढ़ाएगा।
यह उपकरण ऊर्जा-कुशल, पर्यावरण-अनुकूल और आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने योग्य है। इसकी सरल बनावट रखरखाव को आसान बनाती है, जिससे यह छोटे कुम्हारों, ग्रामीण उद्यमियों और प्रशिक्षण केंद्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
एसीआईसी एमआईईटी मेरठ फाउंडेशन के सीईओ प्रशांत कुमार गुप्ता ने बताया कि इस तकनीक को पेटेंट के लिए भेज दिया गया है। उनका मानना है कि यह मॉडल न केवल मिट्टी कला को नई पहचान देगा, बल्कि ग्रामीण रोजगार, स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगा।
संस्थान के वाइस चेयरमैन गौरव अग्रवाल ने कहा की नवाचार इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों और साधारण शिक्षा के बावजूद नई सोच और मेहनत से समाज के लिए बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।
इस इन्नोवेशन पर संस्थान के चेयरमैन विष्णु शरण, वाइस चेयरमैन पुनीत अग्रवाल, गौरव अग्रवाल, कैंपस निदेशक डॉ संजय कुमार सिंह ने बधाई दी।


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