पीएम के आह्वान का निहितार्थ
इलमा अज‍़ीम 
फिलवक्त मौजूदा वैश्विक संकट से भारत को निजात दिलाने और इससे प्रभावित हो रहे आम भारतीयों के हितों की रक्षा करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने, आयातित वस्तुओं का उपभोग मितव्ययिता पूर्वक करने और इनके मौजूद देशी विकल्प को आजमाते हुए स्थायी हल निकालने और उनपर निर्भर होने की दिशा में जनसहयोग का आह्वान करके सबको चौंका दिया है। समझा जाता है कि अमेरिका, चीन, यूरोप और अरब के कुछ देशों के द्वारा लगातार भारत विरोधी षड्यंत्र किए जा रहे हैं। 

कोई अपना इस्लामिक एजेंडा भारत पर थोपना चाहता है तो कोई भारत-रूस के भरोसेमंद सम्बन्धों में पलीता लगाना चाहता है और कोई भारत को पाकिस्तान, बंग्लादेश और चीन के त्रिपक्षीय कुचक्र में उलझा कर अपना आर्थिक हित साधना चाहता है। जबकि, तेजी से आर्थिक और सैन्य उन्नति कर रहा 21वीं सदी का भारत अब रूस-ईरान-इजरायल के सहयोग से मध्य एशिया, पश्चिम एशिया और यूरोप के बाजारों तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में अग्रसर है।  

भारत-यूरोप की बढ़ती नजदीकियों और उसको निकट भविष्य में और अधिक बल देने वाली विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं पर अमल से चिढ़े अमेरिकी डीप स्टेट और उनके चीनी-अरबी पिट्ठुओं ने पहले ईरान को बर्बाद करने और फिर इंडिया को उसकी तपिश में झुलसाने की जो कुचक्र रची है, अब भारत उसकी भी काट ढूंढ चुका है। इस बार भारत ने लोकल फ़ॉर वोकल और चीनी वस्तुओं के बहिष्कार करने की जगह विदेशी मुद्रा बचाने हेतु विभिन्न सकारात्मक पहल करने का आह्वान किया है।

 प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा सरकार अपनी त्रासदी से निपटने के लिए आपसे कोई सोना नहीं मांग रही है, बल्कि अगले 1 साल तक इनकी खरीदारी कम करने की बात कह रही है ताकि विदेशी मुद्रा बचे। इसी कड़ी में उन्होंने उन तमाम वस्तुओं का जिक्र बारी-बारी से किया और कहा कि इनपर विदेशी मुद्रा ज्यादा खर्च होते हैं, इसलिए अगले 1 साल तक इनका संयमित उपभोग कीजिए। दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कीजिए। 

स्पष्ट है कि यह सिर्फ “देशभक्ति” वाला संदेश नहीं होता; बल्कि यह आर्थिक संकेत भी होता है कि सरकार को वैश्विक अनिश्चितता, महंगे आयात, या डॉलर पर दबाव की चिंता है। ऐसा इसलिए कि जब विदेशी मुद्रा पर दबाव होता है, तब देश कोशिश करता है कि रुपये पर ज्यादा दबाव न पड़े, जरूरी आयात (तेल, दवा, रक्षा) जारी रह सकें, महंगाई नियंत्रित रहे, विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहे। 

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