जो समाज अतीत नहीं जानता उसका कोई भविष्य नहीं : हरिवंश
भोपाल।हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी प्रसंग पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संविमर्श "प्रणाम! उदंत मार्तंड" में 'नए भारत का निर्माण और हम भारत के लोग' विषय पर चर्चा करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने अपने विचार साझा किए।
पत्रकारिता की दुनिया से राजनीति की दुनिया में आए श्री हरिवंश ने कहा, मैं पत्रकारिता का बीता हुआ कल हूं। आज कल वहां जिम्मेदारी निभाता हूं जहां सुनना अधिक है और बोलने का अवसर कम आता है। पत्रकारिता के ध्येय पर बात रखते हुए उन्होंने कहा जो समाज अपना अतीत नहीं जानता उसका भविष्य नहीं है। पंडित युगल किशोर शुक्ल ने हिंदी समाचार पत्र को शुरू करने के साथ ही पत्रकारिता के ध्येय को भी स्पष्ट किया था। हिंदुस्तानियों के हित के हेत के अतिरिक्त मास्टहेड 'उदंत मार्तंड' के नीचे एक श्लोक के माध्यम से उन्होंने हिंदी पत्रकारिता की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया था।
पत्रकारिता के समाज के प्रति दायित्व को भारतेंदु हरिशचन्द्र और गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे पत्रकारों ने अपने समाचार पत्रों के माध्यम से जनता के समक्ष रखा।नए भारत के निर्माण को रेखांकित करते हुए श्री हरिवंश ने कहा कि भारत सरकार इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की नीतियों पर काम कर रही है। 80 और 90 के दशकों में भारत सरकार द्वारा की गई नीतिगत विफलताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया की कैसे इच्छा शक्ति की कमी के चलते भारत दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुका था। वर्तमान सरकार आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है। यदि स्वतंत्रता के समय भी सरकारों ने सही रणनीति बनाई होती तो आज हमारा देश विकास के अलग पायदान पर होता।
टेक्नोलॉजी के महत्व पर बात करते हुए हरिवंश जी ने कहा कि टेक्नोलॉजी में पीछे रहने वालों का कोई भविष्य नहीं है और यदि कोई देश इस समय टेक्नोलॉजी को ठीक तरीके से नहीं अपनाता तो वह प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएगा। उन्होंने पश्चिम की दवा कंपनियों और उनके हथियार बेचने की साजिशों पर प्रकाश डालते हुए भारत सरकार के समावेशी प्रयासों पर भी बात की।"21वीं सदी के अनपढ़ वे नहीं होंगे जो पढ़ और लिख नहीं सकते, बल्कि वे होंगे जो सीखना, सीखी हुई बात को भुलाना (Unlearn) और फिर से सीखना (Relearn) नहीं जानते।"एल्विन टॉफ़लर के इस कथन के साथ उन्होंने अपना वक्तव्य समाप्त किया।
हैरी पॉटर से ज्यादा रोचक हैं नरेन्द्र कोहली की पुस्तकें - विकास मिश्र
वरिष्ठ संपादक विकास मिश्र ने भारत की जनता का अपने नैतिक कर्तव्यों के प्रति उदासीन होने की बात की। उन्होंने कहा, हम क्या कर रहे हैं? हम केंद्र सरकार की योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं? हेलमेट न लगाने से लाखों मौतें हो रही हैं। ऑटो चालक यातायात नियमों का पालन नहीं करते। विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में जगह बनाने के लिए भाषा की शुद्धता अनिवार्य है नई पीढ़ी में पहले जैसे भाषिक संस्कार नहीं रहे क्योंकि वे भारतीय साहित्य पढ़ना भूलते जा रहे हैं । बच्चे हैरी पॉटर पढ़ रहे हैं पर हनुमान जी की कहानी से परिचित नहीं हैं। नरेन्द्र कोहली की किताबें ये बता सकती हैं कि हमारी पौराणिक कहानियां कितनी रोचक हैं।
जो टेक्नोलॉजी को नहीं सीखेगा वह गुलाम हो जाएगा-प्रत्यूष रंजन
फैक्ट चेक और AI विषय पर दक्षता रखने वाले प्रत्यूष रंजन ने कहा अधिकार के साथ-साथ हमें अपने कर्तव्य के प्रति सतर्क होना होगा। यदि हमने किसी गलत खबर को आगे बढ़ाया तो यह आज के समय का सबसे बड़ा खतरा है। AI अब हमारे जीवन में हर तरह से प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने कहा कि एआई हमें डिक्टेट न करे, हम एआई को डिक्टेट करें। ए आई को मालिक न बनने दें अपना सेवक बनाकर रखें.कृत्रिम बुद्धिमता से ऊपर मनुष्य की बुद्धिमता है, यह बात हमें नहीं भूलना चाहिए।
माखनलाल आना मुझे हमेशा भावुक कर देता है- सईद अंसारी
टीवी पत्रकारिता से जुड़े सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता की साख पर बहुत बड़ा संकट है। उसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी हम सबकी है। उन्होंने कहा कि देश प्रेम ही पत्रकारिता की सच्ची परिभाषा है। उनके अनुसार नए भारत के निर्माण के लिए जरूरी है कि हम पीछे जाएं और रामराज्य को वर्तमान में ले आएं, हमारी सब समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
बच्चों के निर्माण से होगा राष्ट्र निर्माण -उदय कुमार
वरिष्ठ संपादक उदय कुमार ने सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने सभी वक्ताओं की बातों का सार प्रस्तुत करते हुए कहा हमें पश्चिम के देशों से सीखना चाहिए कि स्वच्छता को अपने जीवन में कैसे अपनाना है। हमें अपनी भाषा में पकड़ मजबूत करनी होगी। भाषा कोई भी सीखो पर देश का विकास करना है तो हिंदी भाषा ही अपनानी होगी। माता पिता यदि राष्ट्र बनाना चाहते हैं तो अपने बच्चे को समर्थ और संस्कारी बनाएं । गांधी जी ने अपने लेख में रामराज्य का जिक्र किया जो आज सबका साथ सबका विकास के रूप में हमारे सामने है।



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