50 साल बाद गलती छिपाने के लिए आया सेटबैक नियम
सेक्टर 3-4 में धरने पर बैठी महिलाओं ने आवास विकास को ठहराया जिम्मेदार
मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेक्टर 2 और 4 में सेटबैक के खिलाफ महिलाओं का धरना प्रदर्शन लंबे समय से जारी है। इसी के बीच शनिवार को सेक्टर चार की महिलाओं की और से अधिवक्ता राकेश कुमार पाठक ने मीडिया बीफ्रिग करते हुूए समस्त प्रभावित परिवारों ने अपनी सामाजिक, आर्थिक और मानसिक परेशानियों को सामने रखते हुए शासन-प्रशासन और आवास विकास परिषद से न्याय की मांग की।
पीड़ित परिवारों ने कहा कि जिन मकानों में वे कई दशकों से रह रहे हैं, अब उन्हीं मकानों को सेटबैक नियमों के नाम पर विवादित बताकर कार्रवाई की जा रही है। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।
अधिवक्ता राकेश कुमार पाठक ने कहा कि आवास विकास परिषद द्वारा योजना विकसित किए जाने के करीब 50 वर्षों तक कभी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि संबंधित आवासों में सेटबैक छोड़ना अनिवार्य है। न तो किसी प्रकार की पूर्व सूचना दी गई और न ही समय रहते कोई कानूनी नोटिस जारी किया गया।इसके बावजूद दशकों तक जलकर, गृहकर, सीवर टैक्स समेत अन्य सरकारी शुल्क लगातार वसूले जाते रहे, जिससे लोगों को यह विश्वास रहा कि उनके मकान वैध हैं।इसके साथ ही पीड़ितों ने आरोप लगाया कि फ्री होल्ड रजिस्ट्री और कॉलोनियों को नगर निगम को हस्तांतरित किए जाने के बाद भी लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। परिवारों का कहना है कि सेटबैक के नाम पर की जा रही कार्रवाई से लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल है तथा सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।उन्होंने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों से अपील की गई कि वे पीड़ित परिवारों के समर्थन में आगे आएं और शासन-प्रशासन तक उनकी आवाज पहुंचाएं। परिवारों ने कहा कि वर्षों बाद अचानक शुरू की गई कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग गंभीर संकट में आ गया है।पीड़ित परिवारों ने शासन और प्रशासन से मांग की कि मानवीय आधार पर मामले की निष्पक्ष सुनवाई कर राहत प्रदान की जाए तथा किसी भी कठोर कार्रवाई से पहले प्रभावित लोगों का पक्ष सुना जाए।



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