अब सुप्रीम कोर्ट में सेंट्रल मार्केट प्रकरण में होगी सुनवाई 

विस्तृत रिपोर्ट के साथ पहुंचेंगे आवास विकास के चेयरमैन और मेरठ के पूर्व कमिश्नर

मेरठ।  सेंट्रल मार्केट प्रकरण के ध्वस्तीकरण प्रकरण में व्यापारियों को राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। गुरूवार को हुई सुनवाई में पहुंचे आवास विकास के चेयरमैन द्वारा दी गई रिपोर्ट को देखने के बाद अब न्यायालय ने आवास विकास के चेयरमैन  मेरठ के पूर्व कमिश्नर रहे ऋषिकेश भास्कर यशोद को विस्तृत रिपोर्ट के साथ 6 अप्रैल में पहुंचने का आदेश दिया है। पहले शुरू हुआ ध्वस्तीकरण भी कमिश्नर के द्वारा दिए गए आदेश के बाद ही रूका था। जिसमें जिले के जनप्रतिनिधियों ने भी सहमति जताई थी।

दरअसल 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया था कि 6 हफ्तों के अंदर आवासीय प्लॉट में चल रही कॉर्मशियल गतिविधियां वाले प्रतिष्ठानों को ध्वस्त किया जाए, और रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दी जाए जो आवास विकास द्वारा जमा नहीं की गई। इसके बाद आज की सुनवाई में पहुंचे आवास विकास के चेयरमैन को अब 6 अप्रैल में विस्तृत रिपोर्ट के साथ आने का आदिश दिया गया है।

 राहत मिलने की संभावना क्षीण 

सूत्रों के अनुसार व्यापारियों को राहत मिलने के कम आसार नजर आ रहे है दरअसल सुप्रीम कोर्ट में सेंट्रल मार्केट जैसे दो मामले चल रहे है। जिसमे एक मामला उडीसा का है । सुप्रीम कोर्ट का कोई भी आदेश एक राज्य के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए होता है। इस लिहाज से व्यापारियों को राहत मिलने के कम संभावना दिखाई दे रही है। अब सब कुछ आगामी 6 अप्रैल को कोई की सुनवाई पर टिका हुआ है। 

अब तक ये एक्शन हुआ

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ की शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवास विकास परिषद ने अवैध रूप से बने 661/6 कॉम्प्लेक्स और 100 से अधिक दुकानों पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है।

यह 35 साल पुराना विवादित निर्माण था, जिसे लेकर कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद सुरक्षाबलों की मौजूदगी में अक्टूबर 2025 में कार्रवाई शुरू की गई। सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय भूखंडों पर अवैध रूप से बनी व्यावसायिक दुकानों (शोरूम) को ध्वस्त करने का आदेश दिया था, जो 35 साल से विवादित था।

अक्टूबर 2025 में आवास विकास परिषद ने पुलिस और भारी सुरक्षा बल के साथ कॉम्प्लेक्स के 22 दुकानों को ढहा दिया और अन्य अवैध निर्माण चिन्हित किए।

बीती 27 जनवरी को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए 6 सप्ताह के भीतर अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था।

कोर्ट की इस डेडलाइन के पूरा होने के करीब आने के साथ ही प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इस आदेश की जद में कुल 1468 निर्माण आ रहे हैं। ये वे भवन हैं जो मूल रूप से आवासीय श्रेणी के हैं लेकिन वर्तमान में यहां बड़े-बड़े शोरूम, कॉम्प्लेक्स और दुकानें संचालित हो रही हैं।

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