अवैध किडनी ट्रांसप्लांट प्रकरण

पहले से दागदार रहा है अल्फा अस्पताल का दामन

अवैध किडनी ट्रांसप्लांट से तार जुड़ने से पहले निलंबित हुआ था अस्पताल का लाइसेंस

पुलिस से साठगांठ कर ले ली थी क्लीनचिट, इसके बाद वापस हो गया था निलंबन 

मेरठ। कानपुर में अवैध किडनी ट्रांस प्लांट प्रकरण में मेरठ के अल्फा अस्पताल का नाम सामने आने से जहां स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वही  अवैध किडनी ट्रांसप्लांट प्रकरण में घिरे अल्फा अस्पताल का दामन पहले से ही दागदार रहा है। मेडिकल कालेज के मरीज को गुमराह कर भर्ती करने के मामले में तीन माह पहले अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। हालांकि पुलिस से साठगांठ के बाद अस्पताल को मुकदमे में क्लीनचिट मिल गई थी।

गाजियाबाद निवासी हरद्वारी लाल की शिकायत पर अल्फा अस्पताल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। हरद्वारी लाल का आरोप था कि 15 नवंबर 2025 को मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती लकवाग्रस्त उनके बेटे मुकेश कुमार को 20 से 25 हजार रुपये में अच्छे इलाज का झांसा देकर अल्फा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। निजी एंबुलेंस के चालक तुषार ने उन्हें झांसा दिया था। यह अस्पताल फिजियोथेरेपिस्ट अमित कुमार चलाते हैं।

वहां भर्ती कराने के बाद मुकेश की तबीयत और बिगड़ती चली गई। हरद्वारी लाल ने बताया कि उन्हें पता चला कि तुषार ने अस्पताल से 90 हजार का कमीशन लेकर मरीज को वहां बेच दिया था। डिप्टी सीएमओ डा. महेश चंद्रा की जांच में आरोप सही पाए गए थे। इसके बाद 28 नवंबर को सीएमओ ने अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। इस मामले में  सीएमओ अशोक कटारिया का कहना है कि मुकदमे में क्लीनचिट मिलने पर लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया को वापस ले लिया गया था।

 आरेपित बनाए गये चिकित्सकों के मोबाईल बंद मिले 

  गुरूवार को कानपुर से एक टीम मेरठ पहुंची । जिसने  मंगल पांडे नगर स्थित अस्पताल पहुंची। टीम ने वहां के रिकार्ड की जांच पड़ताल की। इस दौरान कानपुर से आई टीम ने आरोपित किए गये चिकित्सक डा अफजल, डा अमित कुमार डा वैभव मुदगल के मोबाइल पर बात करने का प्रयास किया लेकिन इस दोरान सबके मोबाइल् बंद मिले। टीम ने अस्पताल के मैनेजर  से बंद कमरे में बातचीत की।  माना जा रहा है कि उक्त आरोपितों की धरपकड़ को कभी भी कानपुर पुलिस की टीम दबिश डाल सकती है।

अस्ताल में भर्ती मरीजों में बैचनी दिखी 

 गुरूवार को जब सीएमओ के साथ कानपुर से आई टीम पुलिस के साथ अस्पताल में पहुंची तो वहां अस्पताल में भर्ती मरीजों के तिमारदार वहां मौजूद थे। एक साथ इतने लोगों को देखकर मरीजों के तिमारदारों में हडकंप मच गये। दोपहर बाद कई मरीजों को उनके तिमारदारों ने अन्य अस्तालों में शिफ्ट करा लिया। 

सीएमओ ने मांगा स्पष्टीकरण

किडनी प्रकरण में नाम आने के बाद सीएमओ डा. अशोक कटारिया ने अल्फा अस्पताल के संचालक से तीन दिन के भीतर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण मांगा है। सीएमओ डा. अशोक कटारिया ने बताया कि समाचार पत्रों से पता चला कि फिजियोथेरेपिस्ट अमित कुमार, डा. वैभव मुदगल और डा. अफजल नामजद हुए हैं। तीन दिन के भीतर जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। गुरूवार तक अस्पताल में संचालक की ओर से नोटिस का जवाब नहीं दिया है। 

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