आवास  विकास परिषद की किसी भी योजना में  नियम का किसी ने भी पालन नहीं किया

 नयी उप विधि से  विभाजित भूखण्डों पर खतरे के बादल दिखने लगे 

 मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन के मद्देनजर आवास एवं विकास परिषद ने योजना संख्या-7 में नोटिस की कार्यवाही शुरू कर दी है। इस कार्यवाही में कमर्शियल निर्माणों के साथ आवासीय निर्माणों को भी सेटबैक छोड़ने होंगे। जो भू-खण्ड के साईज के अनुसार कम या ज्यादा हो सकते हैं। ऐसे में अवैध विभाजित भूखण्डों पर खतरे के बादल दिखने लगे हैं। 

दरअसल 2025 में आई नई उपविधि में उप विभाजित का नियम बनाया है, लेकिन क्षेत्र में दर्जनों से लेकर सैंकड़ो ऐसे भूखण्ड हैं जिन्हें अवैध रूप से विभाजित कर अलग-अलग भू-उपयोग किया जा रहा है। परिषद द्वारा की जा रही नोटिस की कार्यवाही में ऐसे भखण्डों पर सेटबैक छोड़ने की तलवार लटकती नजर आ रही है जो अवैध तरीके से विभाजित कर बेच दिए गए या अलग-अलग भू उपयोग में हैं। नई उप विधि-2025 में बनाए गए नियम बेहतरीन तो हैं ही लेकिन ये उतने जटिल भी हैं। जिसे पूरा करने में निर्माणकर्ता के पसीने छूंट जाएंगे। परिषद की किसी भी योजना में अभी इस नियम का किसी ने भी पालन नहीं किया है और लोगों ने जुगाड़ लगाकर भूखण्डों को अवैध रूप से विभाजित कर भू-उपयोग कर लिया है। जिसमें आवासीय से लेकर अवैध व्यवसायिक निर्माण भी शामिल है। यहां जटिलता ये होगी कि विभाजित हुए कितना और कैसे सेटबैक छोड़ना है। 

ये हैं नई उपविधि-2025 के नियम 

नई उपविधि-2025 के नियमों में भूखण्डों के उप विभाजन के नियम में भी बनाए गए हैं जिसमें बड़े आवसीय भूखण्डों को विभाजित करने का प्रावधान है। नियम की बात करें तो उप-विभाजन न्यूनतम 09 मीटर चौड़े मार्ग व पार्क के सामने 7.5 मीटर पर अनुमन्य होगा।  उप-विभाजन के उपरांत प्रत्येक भूखंड का क्षेत्रफल 100 वर्ग मीटर से कम नहीं होना चाहिए। उपयोग मूल भूखंड के उपयोग के अनुरूप होगा। मूल भूखंड के भू-आच्छादन, एफ.ए.आर. एवं सैट-बैंक के प्राविधान प्रत्येक उप-विभाजित भूखंड पर भी लागू होंगे। उप-विभाजन हेतु निर्धारित विकास शुल्क एवं अविभाजित मूल भूखंड के मूल्य के 1 प्रतिशत की दर से उप-विभाजन शुल्क देय होंगे। आमेलन न्यूनतम 9 मीटर चौड़े मार्ग (आवासीय हेतु) एवं 12 मीटर चौड़े मार्ग या नदीगर आवासीय हेतु) पर अनुमन्य होगा। एक समय में अधिकतम चार भूखण्डों के आमेलेन की अनुमति होगी। आमेलित भूखंड का भू-आच्छादन, एफ.ए. आर. एवं सैट-बैंक आमेलित किए गए भूखंडों के आकार के अनुसार लागू होगा। आमेलित भूखण्ड का उपयोग (भूखंड पर श्रेणी/क्रिया सहित) मूल भूखण्डों के उपयोग के अनुरूप ही होगा। जिन भूखण्डों पर निर्माण हो चुका है, उनके आमेलन के प्रकरण में संशोधित मानचित्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा एवं संबधित शुल्क भी लागू होंगे। भूखण्डों के आमेलन हेतु विकास शुल्क एवं आमेलित भूखंड के मूल्य के 1 प्रतिशत की दर से आमेलन शुल्क देय होंगे। ईडब्ल्यू.एस. एल.आई.जी. अफोर्डेबल आवासीय योजनाओं में भूखंडों का आमेलन अनुमन्य नहीं होगा।

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