पौधों के विकास कर तरह मनुष्य के विकास के लिए शिक्षा जरूरी - मंत्री धर्मपाल सिंह
दीक्षांत समारोह में 203 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 29 शोधार्थियों को मिली पीएच.डी. की उपाधि
आईआईएमटी विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने प्रदान किए मेधावियों को मेडल
- दीक्षांत समारोह में 2024 बैच की 1736 डिग्री (145 डिप्लोमा, 1068 यूजी, 523 पीजी) तथा 2025 बैच की 1972 डिग्री (100 डिप्लोमा, 1401 यूजी, 450 पीजी) प्रदान की गयीं
- 17 छात्र-छात्राओं को स्वर्गीय श्री ओम प्रकाश गुप्ता स्मृति पुरस्कार (यूनिवर्सिटी टॉपर), श्रीमती (डॉ.) सत्य प्रभा गुप्ता स्वर्ण पदक, कुलाधिपति स्वर्ण पदक दिए गए
- करीब चार हजार विद्यार्थियों को मिली डिग्री, 203 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक, डॉक्टरेट की तीन मानद उपाधियां
मेरठ। डिग्री प्राप्त करना शैक्षिक जीवन का समापन नहीं बल्कि यह शुरूआत है भारत के विकास में सहयोगी बनने की। आईआईएमटी विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षान्त समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों से नौकरी पाने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने वाला बनने के लिए प्रेरित किया। माननीय उपराष्ट्रपति महोदय ने विद्यार्थियों से जीवन में सफलता प्राप्त करने के बाद अपने शिक्षकों और अभिभावकों की कडी मेहनत को न भूलने के लिए प्रेरित किया।
दीक्ष्रांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए हुए मंत्री धर्मपाल सिंह ने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्हें कठोर परिश्रम कर सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। देश के पशुधन, दुग्ध विकास एवं राजनैतिक पेंशन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि जैसे पौधों को विकास के लिए पानी चाहिए, वैसे ही मनुष्य को विकास के लिए शिक्षा चाहिए। आईआईएमटी विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर देश के विकास में सहयोग कर रहा है।
इससे पूर्व आईआईएमटी विवि के तृतीय दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का स्वागत आईआईएमटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगेश मोहनजी गुप्ता, प्रति कुलाधिपति डॉ. मयंक अग्रवाल ने किया। उपराष्ट्रपति के गाउन पहनने और फोटो सेशन के बाद एनसीसी कैडेट्स द्वारा सलामी दी गयी। तत्पश्चात शोभायात्रा प्रारंभ हुई जिसमें एकेडमिक कांउसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य, कुलपति, प्रति कुलाधिपति, कुलाधिपति, कुलसचिव के साथ माननीय उपराष्ट्रपति जी शोभायात्रा में शामिल हुए।
सभागार में शोभायात्रा का आगमन होते ही सभागार में उपस्थित व्यक्तियों ने उपराष्ट्रपति के सम्मान में खड़े होकर, तालियों की गड़गड़ाहट के साथ शोभायात्रा का स्वागत किया। तत्पश्चात उपराष्ट्रपति मंचासीन हुए। दीक्षांत समारोह के मंच पर उपराष्ट्रपति माननीय सी.पी. राधाकृष्णन जी के साथ आईआईएमटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगेश मोहनजी गुप्ता, प्रति कुलाधिपति डॉ. मयंक अग्रवाल, कुलपति डॉ. दीपा शर्मा, कुलसचिव डॉ. वी.पी. राकेश, मंत्री धर्मपाल सिंह एवं राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपयी जी मौजूद रहे।
कुलाधिपति योगेश मोहनजी गुप्ता ने विद्यार्थियों को दीक्षान्त समारोह की शपथ दिलाई। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति माननीय सी.पी. राधाकृष्णन जी द्वारा आईआईएमटी विश्वविद्यालय की वार्षिक टेक्निकल मैगजीन ‘ऊर्ध्व’ के प्रथम एडिशन का विमोचन किया गया।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन जी ने मंच से चार विश्वविद्यालय टॉपर और 13 विभिन्न कॉलेजों के टॉपर्स सहित 17 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन जी द्वारा निरंजन पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज, परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, महर्षि पाराशर ज्योतिष विद्यालय के डायरेक्टर डॉ. हरी सिंह रावत को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गयी।
आईआईएमटी विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षान्त समारोह को संबोधित करते हुए कुलाधिपति योगेश मोहनजी गुप्ता ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन जी का दीक्षान्त समारोह में आने का आभार व्यक्त किया। आईआईएमटी विश्वविद्यालय की परंपरा के बारे में बताते हुए कुलाधिपति जी ने कहा की विद्यार्थियों को शिक्षा, खेल, नवाचार के साथ सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाते हैं। खेलों में विशेष प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 5 लाख रुपए का नगद पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की ओर से अनेक प्रकार की स्कॉलरशिप भी विद्यार्थियों को प्रदान की जाती है। कोविड काल में अपने अभिभावकों को खोने वाले बच्चों के लिए आईआईएमटी समूह की ओर से निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की गई है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कुलाधिपति ने खुद आगे बढ़ने के साथ-साथ देश और समाज को भी आगे बढ़ाने में सहयोग करने का आह्वान किया। समारोह में महापौर हरिकांत अहलूवालिया सहित गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
हाल ही में मेरठ दिल्ली के बीच नमो भारत ट्रेन सेवा और मेरठ में मेट्रो सेवा की शुरुआत से दोनों शहरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ी है जिससे विद्यार्थियोंऔर प्रोफेशनल्स के लिए कार्य के अवसर भी सहज सुलभ हुए हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में दीक्षा समारोह शैक्षिक यात्रा का समापन नहीं बल्कि बहुत से नए लक्ष्यों की शुरुआत है। विद्यार्थियों को बोले कि विफलता से घबराना नहीं चाहिए। हर विफलता नई सीख देती है। इसलिए विफलताओं से सीख लेकर जीवन में आगे बढ़ें।उन्होंने कहा कि युवाओं पर समाज को मजबूत करने की जिम्मेदारी है
203 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 29 शोधार्थियों को मिली पीएच.डी. की उपाधि
आईआईएमटी विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षान्त समारोह में कुल 3940 विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधियां प्रदान की गयीं। इसमें 203 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया और 29 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि दी गयी।
स्वर्गीय श्री ओम प्रकाश गुप्ता स्मृति पुरस्कार (यूनिवर्सिटी टॉपर) मद्दूरी सृजन कुमार स्कूल ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेज़, ऋतिक राठी आईआईएमटी कॉलेज ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (एलाइड हेल्थ साइंसेज़), अदिति सिंघल स्कूल ऑफ़ बेसिक साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कनिष्का आईआईएमटी कॉलेज ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (एलाइड हेल्थ साइंसेज़) को दिया गया। प्रियम् गर्ग कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन को मेजर ध्यानचंद स्मृति स्वर्ण पदक (खेलों में उत्कृष्टता) दिया गया।
श्रीमती (डॉ.) सत्य प्रभा गुप्ता स्वर्ण पदक, शैलेश कुमार शुक्ला आईआईएमटी कॉलेज ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (फार्मेसी), खुशी गोयल स्कूल ऑफ़ होटल मैनेजमेंट, कैटरिंग एंड टूरिज़्म, शैली सिंह स्कूल ऑफ़ लाइफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, जेनिफ़र बेग स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, महक माहेश्वरी स्कूल ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशंस, कुमारी विशाखा स्कूल ऑफ़ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट को दिया गया।
कुलाधिपति स्वर्ण पदक, यशिका मांगलिक कॉलेज ऑफ़ लॉ, नीतीश सिंह स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, शिवानी आईआईएमटी कॉलेज एवं अस्पताल (नेचुरोपैथी एवं योग विज्ञान), ऐश्वर्या करवाल स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, आराधना पटेल आईआईएमटी कॉलेज ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (नर्सिंग), विनय कुमार स्कूल ऑफ़ फार्मास्यूटिकल साइंसेज को दिया गया।
दीक्षांत समारोह में 2024 बैच की 1736 डिग्री (145 डिप्लोमा, 1068 यूजी, 523 पीजी) तथा 2025 बैच की 1972 डिग्री (100 डिप्लोमा, 1401 यूजी, 450 पीजी) प्रदान की गयीं।




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