जिला अस्पताल के डाक्टरों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप
बोले जमीन खरीदने के मामले किया गया फर्जीवाडा
मेरठ। जिला अस्पताल के डाक्टर और उनके बीच का भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें इन डाक्टरों की कारगुजारियों के चलते प्रशासनिक अधिकारियों की कुर्सी भी खतरे में पड़ सकती है। आरोप है जिला अस्पताल डॉक्टरों ने जमीन बेचने के मामले डॉक्टरों ने फर्जी मेडिकल रिपोर्ट लगा दी।
अधिवक्ता संदीप पहल ने जिला अस्पताल के डाक्टरों के भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए कुछ तथ्यात्मक खुलासे किए। उन्होंने बताया कि दलितों की जमीन बेचने के लिए जिला अस्पताल के डाक्टर वीर सिंह व डा. अनुराग तोमर द्वारा फर्जी डाक्टरी बनाई है। जिस पर चिकित्सा अधीक्षक कोशलेन्द्र सिंह ने मुहर लगाकर इस फर्जीवाड़े में साथ दिया है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि उक्त डाक्टरों ने दर्जनों फर्जी मेडिकल रिपोर्ट अलग-अलग न बनाकर एक जगह ही बनाई है। सभी डाक्टरी के आधार पर उर्जा मंत्री डा. सोमेन्द्र की पत्नि के नाम बनी ट्रस्ट द्वारा ही खरीदी गई हैं। जिससे भ्रष्टाचार का शक और भी गहरा गया है। भूमि बेचने वाली एक महिला का मेडिकल तो प्राईवेट अस्पताल द्वारा बनवाया गया है। जिस पर जारीकर्ता डाक्टर का नाम व मोहर नहीं है तथा मरीज के हस्ताक्षर भी प्रमाणित नहीं। फर्जी मेडिकल मामले में जब अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां कलेक्ट्रेट अभिलेखागार से ली गयी तो उनसे सम्बन्धित ही सूचना के लिए आवेदन किया गया।
लेकिन जिला अस्पताल के जन सूचना अधिकारी व प्रथम अपीलीय अधिकारी ने तृतीय पक्ष सूचना बताकर सूचना देने से इंकार कर दिया। यानि भ्रष्टाचार को छुपाने की पूरी कोशिश की जा रही है।
अधिवक्ता संदीप पहल ने कहा कि दलितों की जमीन को फर्जीवाड़ा कर खरीदा व बेचा गया है। इस मामले में वह शासन स्तर तक जाएंगे और फर्जीवाड़े की भूमि को सरकार के पक्ष में कराने का कार्य जारी रखेंगे।
बोली एस आई सी
जब इस सम्बंध में प्रमुख अधीक्षक सुदेश कुमारी से बात की गई उन्होंने कहा कि पहले इस मामले को दिखवाया जाएगा उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।


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