विज्ञान घर में बच्चों ने सीखी उड़ान की तकनीक
मेरठ। बिजली बंबा बाई पास स्थित विज्ञान घर के आठवें दिन का आयोजन बेहद खास और रोमांचक रहा, जहां बच्चों ने विज्ञान को व्यवहारिक रूप में सीखते हुए अपने हाथों से रिमोट संचालित विमान बनाकर उसे सफलतापूर्वक उड़ाया।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह रचनात्मक गतिविधि से हुई, जिसमें बच्चों ने मिट्टी और बेकार अखबार का उपयोग कर बाल्टियाँ तैयार कीं। इस गतिविधि के माध्यम से उन्हें पुनः उपयोग (रीसाइक्लिंग) और पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाया गया। इसके बाद मुख्य सत्र में अनुपम नैन जी, जो राजकीय पॉलिटेक्निक लखनऊ से ड्रोन टेक्नोलॉजी में पीजी कोर्स कर रहे हैं, ने बच्चों को एयरोडायनामिक्स के मूल सिद्धांतों, इलेक्ट्रॉनिक मटेरियल्स और उनके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बहुत ही सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया कि किस प्रकार हवा में किसी वस्तु को संतुलित रखते हुए उड़ाया जाता है और रिमोट के माध्यम से उसे नियंत्रित किया जाता है। अनुपम नैन जी के मार्गदर्शन में बच्चों ने स्वयं रिमोट संचालित एरोप्लेन तैयार किया। इस दौरान उन्होंने एरोप्लेन के विभिन्न भागों जैसे विंग्स, मोटर, प्रोपेलर और कंट्रोल सिस्टम को जोड़ना सीखा। साथ ही यह भी समझा कि कैसे रिमोट से सिग्नल भेजकर एरोप्लेन की दिशा, ऊंचाई और गति को नियंत्रित किया जाता है।
एरोप्लेन के निर्माण के बाद उसे मैदान में उड़ाया गया। जैसे ही एरोप्लेन ने उड़ान भरी, बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। यह दृश्य इतना आकर्षक था कि वहां से गुजर रहे लोग भी रुक गए और देखते ही देखते भीड़ इकट्ठा हो गई। सभी ने बच्चों की इस उपलब्धि की सराहना की। उड़ान के दौरान बच्चों ने स्वयं रिमोट से एरोप्लेन को नियंत्रित किया, जो उनके लिए एक यादगार अनुभव बन गया। दोपहर में बच्चों ने दूसरी गतिविधि के अंतर्गत बांस से बोतलें तैयार कीं, जिससे उन्हें प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश मिला। दिन का समापन शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें बच्चों ने गीत, नृत्य और अन्य प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। विज्ञान घर का आठवां दिन बच्चों के लिए सीख, उत्साह और नवाचार का प्रतीक बनकर सामने आया, जहां उन्होंने न केवल विज्ञान को समझा, बल्कि उसे अपने हाथों से साकार भी किया।


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