“विश्व स्तरीय संस्थान का निर्माण करना है तो गुणवत्ता पर शुरुआत से ध्यान दें” – गर्वनर  विजय कुमार सिंह

मेरठ। योजना के प्रारंभिक चरण से ही उत्कृष्टता सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए मिजोरम के माननीय राज्यपाल विजय कुमार सिंह, पीवीएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम (सेवानिवृत्त) ने मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय परिवार को सलाह दी कि संस्थान के निर्माण में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए, क्योंकि “नींव में रह गई कमियों को बाद में दूर करना अत्यंत कठिन हो जाता है।”

राज्यपाल ने सलावा स्थित विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन परिसर का निरीक्षण किया, जिसका निर्माण कार्य आगामी कुछ महीनों में पूर्ण होने की संभावना है। परिसर का विस्तृत अवलोकन करने और विश्वविद्यालय अधिकारियों से संवाद के दौरान उन्होंने दीर्घकालिक दृष्टि, वैश्विक मानकों तथा समावेशी पहुंच के महत्व पर बल दिया, ताकि एक विश्व स्तरीय खेल संस्थान की स्थापना सुनिश्चित की जा सके।

देश के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के अपने व्यापक दृष्टिकोण को साझा करते हुए राज्यपाल ने कहा,

 “यदि हमें विश्व स्तरीय खेल विश्वविद्यालय बनाना है तो गुणवत्ता को प्रारंभ से ही सुनिश्चित करना होगा। बाद में कमियों को दूर करना अत्यंत कठिन होता है। यह संस्थान केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मिजोरम तथा अन्य राज्यों के प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी यहां आकर उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, आधुनिक अधोसंरचना और गुणवत्तापूर्ण खेल शिक्षा का लाभ उठा सकें।”

उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित होने चाहिए, जो भारत को वैश्विक खेल शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल दीप अहलावत (सेवानिवृत्त) ने राज्यपाल को विश्वविद्यालय की आधारभूत संरचना, शैक्षणिक विस्तार योजना तथा गत एक वर्ष की उपलब्धियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में खेल विज्ञान, कोचिंग, प्रबंधन और संबद्ध विषयों सहित कुल 64 पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाने की योजना है।

ग्रामीण क्षेत्र में स्थित विश्वविद्यालय को अपनी शक्ति बताते हुए कुलपति ने कहा, “हमारा उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभाओं को सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक अवसर प्रदान कर उन्हें सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ाना है। यह पूरा क्षेत्र खेल प्रतिभाओं से परिपूर्ण है। विश्वविद्यालय न केवल खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धात्मक उत्कृष्टता के लिए तैयार करेगा, बल्कि उन्हें खेल क्षेत्र में स्थायी करियर के अवसर भी प्रदान करेगा, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान होगा।”

राज्यपाल ने अल्प अवधि में विश्वविद्यालय द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों की सराहना की तथा अपने व्यापक सार्वजनिक और सैन्य अनुभव के आधार पर महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने परिसर में दो घंटे से अधिक समय व्यतीत किया और विभिन्न व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन किया।यह दौरा विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट खेल शिक्षा एवं प्रदर्शन के केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।

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