टोल प्लाजा पर 'हफ्ता वसूली' करने वाले 5 फर्जी किसान नेता गिरफ्तार
मैनेजर को दी थी जान से मारने की धमकी
सहारनपुर। जनपद के सरसावा टोल प्लाजा पर किसान संगठन का डर दिखाकर अवैध वसूली और डराने-धमकाने का खेल करने वालों पर पुलिस का डंडा चला है। थाना सरसावा पुलिस ने टोल मैनेजर की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संगठन से जुड़े पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इन पर रंगदारी मांगने, जान से मारने की धमकी देने और सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध करने जैसे गंभीर आरोप हैं।
टोल प्लाजा मैनेजर शोएब (निवासी कैराना) ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि अरविंद पंवार और उसके साथियों ने टोल ऑफिस में घुसकर जमकर हंगामा किया। आरोपियों ने न केवल अपनी गाड़ियां फ्री में निकलवाने का दबाव बनाया, बल्कि मैनेजर के साथ गाली-गलौज करते हुए 10,000 रुपये प्रति सप्ताह रंगदारी (हफ्ता वसूली) की मांग की। बात न मानने पर आरोपियों ने सड़क पर गाड़ियां खड़ी कर रास्ता जाम कर दिया और जान से मारने की धमकी दी।
घेराबंदी कर दबोचे गए पांच रंगदार
एसएसपी सहारनपुर के निर्देश और एसपी देहात सागर जैन के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी प्रवेश कुमार शर्मा की टीम ने बुधवार को टोल प्लाजा क्षेत्र में छापेमारी की। पुलिस ने मौके से अरविंद पंवार, सुमित पंवार, जयवीर, निक्कू (निवासी हरिद्वार) और योगेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके कब्जे से अवैध रूप से वसूली गई 10,000 रुपये की नकदी भी बरामद की है।
पुलिस की चेतावनी: कानून हाथ में लेने वालों पर होगी सख्ती
एसपी देहात सागर जैन ने बताया कि पकड़े गए सभी पांचों अभियुक्तों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सीएलए एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब उन अन्य अज्ञात व्यक्तियों की पहचान करने में जुटी है जो इस घटना के दौरान वहां मौजूद थे। एसपी देहात ने कहा कि "किसान संगठन किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए होते हैं, न कि डरा-धमकाकर वसूली करने के लिए।" उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस अब जिले के उन सभी वाहनों की जांच करेगी जिन पर किसान संगठनों के झंडे लगे हैं, ताकि फर्जी नेताओं की पहचान की जा सके।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संगठन की आड़ में गुंडागर्दी या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उस गाड़ी को भी सीज कर दिया है जिस पर किसान संगठन का झंडा लगा था, क्योंकि इसका इस्तेमाल अपराध करने के लिए किया जा रहा था।


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