आईआईटी रुड़की के साथ उद्योगों की बड़ी पहल: पश्चिमी यूपी में 100 करोड़ का कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम शुरू

• सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली में बड़े स्तर पर पुनर्योजी खेती कार्यक्रम
• किसानों को कार्बन क्रेडिट के जरिए अतिरिक्त आय का अवसर

मेरठ : पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत कई उद्योग भागीदारों ने  आईआईटी रुड़की  के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर सतत कृषि और कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम शुरू करने के लिए साझेदारी की है। इस पहल के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक निवेश प्रस्तावित है। आईआईटी रुड़की इस कार्यक्रम की नोडल एजेंसी के रूप में इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेगा।

यह पहल उत्तर प्रदेश सरकार का कृषि विभाग द्वारा स्वीकृत है और सहारनपुर मंडल के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में लगभग 5 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को शामिल करने का लक्ष्य रखती है। इस कार्यक्रम में शामिल कंपनियों में टी आर एस टी 01 (Trayambhu Tech Solutions Private Limited), प्रोक्लाइम प्राइवेट लिमिटेड (Proclime Pvt Ltd), कम्प्लायंस-कार्ट प्राइवेट लिमिटेड (Compliance-Kart Pvt Ltd), एक्सेलईएसजी प्राइवेट लिमिटेड (AccelESG Pvt Ltd) और सैट ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (Satt Global Pvt Ltd) शामिल हैं।

राज्य सरकार के सहयोग से इस पैमाने पर शुरू किया जा रहा यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य सतत और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को अपनाना, वैज्ञानिक तरीकों से मिट्टी की सेहत सुधारना और कार्बन संचयन के लिए मापन, प्रतिवेदन और सत्यापन की मजबूत व्यवस्था विकसित करना है। इस पहल के माध्यम से किसानों को उभरते कार्बन बाज़ारों तक पहुंच बनाने और कार्बन क्रेडिट के जरिए अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा, जो लागू मानकों के अधीन होगा।

पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कार्यक्रम में डिजिटल निगरानी प्रणाली, खेत स्तर पर आंकड़ा संकलन और मान्यता प्राप्त कार्बन लेखांकन मानकों के अनुरूप सत्यापन व्यवस्था अपनाई जाएगी।

किसानों को जलवायु के अनुकूल खेती के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से सहायता दी जाएगी। इसमें कम जुताई, फसल अवशेष प्रबंधन, उर्वरकों का संतुलित उपयोग और जल संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे दीर्घकालिक उत्पादकता और कृषि स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

देश में सतत कृषि, जलवायु शमन और ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप यह पहल आगे चलकर अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकती है।

इस पहल पर बोलते हुए प्रो. ए. एस. मौर्य, पृथ्वी विज्ञान विभाग, आईआईटी रुड़की (Indian Institute of Technology Roorkee) ने कहा, “यह पहल विज्ञान, नीति और उद्योग के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो कृषि के माध्यम से बड़े स्तर पर जलवायु कार्रवाई को संभव बनाती है। इससे किसानों को कार्बन बाज़ार में भागीदारी का एक भरोसेमंद रास्ता मिलेगा।”

टी आर एस टी 01 (Trayambhu Tech Solutions Private Limited) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रबीर मिश्रा ने कहा, “यह कार्यक्रम दिखाता है कि कृषि किस तरह एक संगठित जलवायु ढांचे में बदल सकती है। हमारे डिजिटल मापन, प्रतिवेदन और सत्यापन तंत्र तथा टी आर एस टी 01 वेरिटास मंच के माध्यम से हम पारदर्शिता, भरोसा और बड़े स्तर पर बाज़ार तक पहुंच सुनिश्चित कर रहे हैं, जिससे लाखों किसान वैश्विक कार्बन बाज़ार से जुड़ सकें।”

इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन आगामी खरीफ सत्र (मई–जून 2026) से शुरू होने की योजना है। कार्यक्रम का संचालन आईआईटी रुड़की और उद्योग भागीदारों की संयुक्त निगरानी में किया जाएगा।

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