मेरठ की नंदिनी कौशिक उत्तराखंड की सीनियर टीम से लगाएंगी चौके-छक्के

मेरठ। खेल के प्रति जुनून और जज्बा हो तो बेटियां भी कुछ भी करके दिखा सकती हैं। ऐसा ही कुछ मेरठ की रहने वाली महिला क्रिकेटर नंदिनी कौशिक ने करके दिखाया है। उन्होंने अपनी बल्लेबाजी के दम पर उत्तराखंड की सीनिरयर टीम में जगह बना ली है।

अब नंदिनी 6 फरवरी से शुरू हो रहे सीनियर महिला क्रिकेट टूर्नामेंट में उत्तराखंड की टीम का हिस्सा होंगी। यह कामयाबी उन्हें आसानी से नहीं मिली है। इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत और सच्ची लग्न है। उनकी दिन रात की महनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।

 हापुड़ अड्डा स्थित गांधी नगर में रहने वाली नंदिनी कौशिक पिछले 6 वर्षों से क्रिकेट खेल रही हैं। वह सीधे हाथ की ताबड़तोड़ बल्लेबाज हैं और वनडे फॉर्मेट में भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल को अपना आदर्श मानती है।हालांकि उन्होंने मेरठ में ही कोच छाया कराना को देखकर क्रिकेट सीखने की शुरूआत की। उन्होंने छाया कराना की ही कराना क्रिकेट एकेडमी में प्रशिक्षण लेकर क्रिकेट सीखा।

छह वर्ष से कराना क्रिकेट एकेडमी में ले रही हैं प्रशिक्षण

पिछले छह वर्षों से वह यहां बिजली बंबा बाईपास स्थित कराना क्रिकेट एकेडमी में ही प्रशिक्षण कर रही हैं। उनके खेल के शानदार प्रदर्शन के आधार पर ही अब उनका चयन उत्तराखंड की सीनियर टीम में हुआ है। इसके लिए कोच छाया ने भी उन्हे बधाई दी है।नंदिनी के अलावा मेरठ में ही अभ्यास करने वाली करुणा भी उत्तराखंड की सीनियर टीम में जगह बना चुकी हैं। वह मूलरूप से उत्तराखंड की ही रहने वाली हैं और यहां मेरठ में रहकर उन्होंने गेम सिटी एरेना में क्रिकेट की बारीकियां सीखीं।

उत्तराखंड प्रीमियर लीग में भी कर चुकी हैं शानदार प्रदर्शन

नंदिनी कौशिक उत्तराखंड प्रीमियर लीग में भी दो सीजन में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं। अंडर 19 में भी उत्तरखंड के लिए खेल चुकी हैं।उन्होंने उत्तराखंड लीग में पिथौरागढ़ की ओर से खेलते हुए शानदार बल्लेबाजी की। एक मैच में ताबड़तोड पचास रन भी बनाए। मल्टीडेयज ट्रॉफी मैच भी उन्होंने सबसे अधिक रन बनाए और चयनकर्ताओं को आकर्षित किया। इसी का नतीजा है जो उन्हें आज सीनियर टीम में जगह मिली है।

पिता चलाते हैं छोले भटूरे का स्टॉल

नंदिनी कौशिक तीन बहन भाइयों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता हापुड़ अड्डे पर ही पिछले कई वर्षों से पंडित जी छोले भटूरे के नाम से दुकान चलाते हैं। उन्होंने अपनी बेटी नंदिनी की पढ़ाई लिखाई हरिद्वार से ही कराई।

वर्तमान में भी नंदिनी हरिद्वार में ही कक्षा 12 में पढ़ रही हैं। इसी के चलते उन्हे उत्तराखंड से खेलने का मौका मिला है। उनके पिता ने बताया कि बेटी को बचपन से ही क्रिकेट का शोक था जिसके चलते उन्होंने उसे क्रिकेट खेलने की छूट दी।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts