जहां पहले लोग नाक बंद कर निकलते थे अब ले रहे चाय कर चुस्की 

 खजूरी के कूढे के ढेर को पर्यटन पार्क में बदला ,500 पेड़ लगाकर पक्षी आश्रय स्थल भी बनाया

मेरठ। कूडा के ढेर से कैसे निपटा जा सकता है। इसका बेहतर नमूना खूजरी में देखने को मिलेगा जहां पर दस लाख रूपये की लागत से कूडै के ढैर केा पर्यटन पार्क मे तब्दील किया गया है। अब यहां पर नाक बंद कर नहीं वरन पार्क में चुस्की लेते नजर आ रहे है। 

 ग्राम पंचायत खजूरीगांव में पहले जिस स्थान पर कूड़े के ढेर लगे रहते थे, आज वहां हरियाली है।ग्राम पंचायत ने अपनी निधि से इस उपेक्षित स्थान को खूबसूरत टूरिज्म पार्क का रूप दिया है। पार्क में घूमने के लिए सुसज्जित ट्रैक बनाए हैं। जगह-जगह आकर्षक बेंच और सुंदर हट बनी हैं। ईको फ्रेंडली टी स्टाल पर लोग चाय का लुत्फ उठाते हैं और सेल्फी भी लेते हैं।रंग-बिरंगी लाइटें और साफ-सुथरा वातावरण देख लगता ही नहीं कि यह वही स्थान है, जहां से कभी नाक बंद करके गुजरना पड़ता था। ग्राम पंचायत का यह प्रयास इस बात की भी तस्दीक है कि मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर किसी गांव को पर्यटन स्थल भी बनाया जा सकता है। 

लागत आई 10 लाख रुपये 

खजूरी गांव की प्रधान अफसाना ने बताया कि परीक्षितगढ़ रोड पर तालाब किनारे ग्राम समाज की दो बीघा जमीन में ग्रामीण कूड़ा डालते थे। सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि अब यहां कोई कूड़ा नहीं डालेगा।

 ग्राम सचिव विक्रांत त्यागी ने बताया कि एक बार डीएम डा. वीके सिंह ने बैठक में कहा था कि सचिव ग्राम पंचायतों की आमदनी बढ़ाने के लिए कुछ नया करें। इसी के बाद प्रधान और सचिव ने मिलकर यह प्रोजेक्ट डीएम और डीपीआरओ वीरेंद्र सिंह के सामने रखा। सभी ने मुहर लगाई तो करीब 10 लाख रुपये की लागत से पार्क बना दिया गया। 

 पांच हजार रुपये किराये पर दिया टी-स्टाल 

सचिव विक्रांत त्यागी ने बताया कि टूरिज्म पार्क के अंदर ईको फ्रेंडली टी स्टाल बनाया गया है। यहां सुबह-शाम लोग चाय पीने आते हैं। इसे पांच हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर दिया हुआ है, जिससे ग्राम पंचायत की आमदनी भी होती है।

 10 रुपये की चाय मिलती है। प्रधान अफसाना के पति नदीम ने बताया कि टूरिज्म पार्क के पास ढाई बीघा जमीन भी खाली पड़ी थी। प्रधान और सचिव को लगा कि ग्रामीण अब यहां कूड़ा डालना न शुरू कर दें, इसलिए इस स्थान पर 500 पेड़ लगाए गए। पेड़ों पर 500 घोंसले बनाए हैं, जिससे यहां पक्षियों की संख्या बढ़ रही है। इसे पक्षी आश्रय स्थल का नाम दिया है। 

 खजूरी गांव में जनवरी 2025 में निरीक्षण के दौरान उक्त स्थल को देखा था, उस समय वहां गंदगी का साम्राज्य था। ग्राम पंचायत निधि से अधिकारियों के सहयोग से काम हुआ। कुछ दिन पहले गांव गई थी तो नजारा बदला हुआ दिखा। इस तरह का काम हर गांव में हो सकता है। -नूपुर गोयल, सीडीओ

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