सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

 नाड़ा खींचना और अंगों को छूना बलात्कार का प्रयास

 इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश पलटते हुए शीर्ष अदालत की सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को पलट दिया है, जिसमें युवती के साथ की गई अश्लील हरकतों को 'बलात्कार की कोशिश' न मानकर केवल 'बलात्कार की तैयारी' बताया गया था। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी लड़की के पायजामे का नाड़ा खींचना और उसके अंगों को छूना सीधे तौर पर बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में आता है।

यह मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से जुड़ा है, जहां साल 2021 में एक 14 वर्षीय किशोरी के साथ तीन युवकों ने रास्ते में छेड़खानी और अभद्रता की थी। आरोप है कि आरोपियों ने पीड़िता को पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास किया और उसके कपड़ों के साथ छेड़छाड़ की। इस मामले पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 मार्च 2025 को आरोपियों पर लगी 'बलात्कार के प्रयास' की धाराओं को हटा दिया था। हाईकोर्ट का तर्क था कि यह कृत्य केवल बलात्कार की तैयारी का हिस्सा था, प्रयास का नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की इस दलील को आपराधिक कानून के सिद्धांतों का गलत इस्तेमाल बताया। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणियां पूरी तरह असंवेदनशील और अमानवीय नजरिया दिखाती हैं। पीठ ने जोर देकर कहा कि ऐसे फैसलों का पीड़ितों पर भयावह प्रभाव पड़ता है, जिससे वे न्याय की लड़ाई लड़ने से पीछे हट सकते हैं। शीर्ष अदालत ने न केवल हाईकोर्ट का फैसला पलटा, बल्कि निचली अदालत के उन आरोपों को बहाल कर दिया जिनमें आरोपियों पर पॉक्सो एक्ट और बलात्कार के प्रयास की धाराएं लगाई गई थीं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था, क्योंकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद देशभर के कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने भारी विरोध दर्ज कराया था। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में भी अदालतों को आगाह किया था कि फैसले लिखते समय ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण भाषा के इस्तेमाल से बचना चाहिए जो पीड़ित के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाए या उसे डरा दे। इस फैसले के बाद अब आरोपियों के खिलाफ बलात्कार के प्रयास और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।

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