एआई के दौर में बच्चे

राजीव त्यागी 

इंटरनेट ने बच्चों को उम्र से पहले परिपक्व बनाना शुरू कर दिया है। अब एआई की बारी है जो उन्हें वहां पहुंचा सकती है जिसके बारे में हमने सोचा तक नहीं। हाल में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान फिक्की-यूनिसेफ की संयुक्त कार्यशाला में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद ने कहा कि भारत में डिजिटल पैठ तेजी से बढ़ रही है और बच्चे एआई संचालित प्लेटफॉर्म्स की ओर खिंचे जा रहे हैं। अब जरूरी है कि एक समग्र और सशक्तीकरण करने योग्य फ्रेमवर्क तैयार किया जाये ताकि बच्चों का समुचित विकास हो। एआई अब सीखने के पैटर्न को एक आकार दे रहा है। हमें देखना होगा कि बच्चे क्या सूचना पाना चाहते हैं और एआई इस्तेमाल करने के बाद उनका व्यवहार कैसा रहता है। इस पर सभी भागीदारों यानी अभिभावकों, स्कूलों, शिक्षकों वगैरह को ध्यान देना होगा। 

यह भी देखना होगा कि जो बच्चे एआई की मदद से पढ़ाई कर रहे हैं या करेंगे उनका दीर्घकालीन विकास कैसा होता है। बच्चों के विकास पर समय के साथ एआई का क्या प्रभाव पड़ता है उसका अध्ययन करना होगा। हालांकि देश में इसके लिए कई तरह की पहल की हैं ताकि एआई पर लगाम लगाई जा सके। लेकिन शासन द्वारा ऐसा मेकेनिज्म तैयार करना चाहिए जिससे बच्चों के भविष्य में बदलाव हो सके।


 जिससे उन्हें कई तरह के अवसर मिलते रहें ताकि उनका और विश्व का भविष्य संवरे। एआई अब चूंकि शिक्षा, स्वास्थ्य के अलावा खेलकूद में भी तेजी से आ रहा है और बच्चों की दुनिया बदल रहा है। बच्चों की परफॉर्मेंस भी वही सेट करने लगा है। ऐसे में बच्चों को सही मार्गदर्शन की जरूरत है। वे गलत राह न जायें, इसकी भी व्यवस्था करनी होगी। 

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