राज्य सभा सांसद डा लक्षमी कांत वाजपेयी ने राज्य सभा के शुन्य काल में उठाया एम्स का मुददा
डा. वाजपेयी का किया 45 सांसदों ने समर्थन
मेरठ। राज्य सभा सांसद डा . लक्ष्मी कांत वाजपेयी ने बुधवार को राज्य सभा के शून्य काल में राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्ण के समक्ष अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान का मुददा उठाया।
राज्य सभा में दिए गये समय पर बोलते हुए डा . वाजपेयी ने कहा भारत सरकार सामान्य जन्ता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए लगातार प्रसासरत है। आज वह वेस्ट यूपी के 24 जिलों व 6 मंडल जिसमें मेरठ मंडल की जनसंख्या 1,45,75,668 सहारनपुर मंडल की जनसंख्या 8923544 मुरादाबाद मंडल की जनसंख्या 14823692 व बरेली मंडल की जनसंख्या 13167800 आगरा मंडल की जनसंख्या 11311331अलीगढ़ मंडल की जनसंख्या 8436468 है जिसका टोटल 71238503 बैठती है। उन्होने कहा कि स्वास्थ्य विशेषज्ञाें और स्थानीय लोगों का मानन है। कि यदि मेरठ में एम्स जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं वाले अस्पताल उपलब्ध हो जाए तो न केवल मेरठ बल्कि आसपास के दर्जनों जिलों के मरीजों को गंभीर बीमारी की हालत में दिल्ली कीे दौड़ नहीं लगानी होगी।
उन्होने कहा वर्तमान में मेरठ में मेडिकल सुविधाओं का स्तर को देखते हुए ह्दय रोग ,गेस्ट्रो श्रवसन संबधी रोग एवं कैंसर के गंभीर मरीजों का बेहतर ईलाज संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मेरठ में एम्स की स्थापना हो क्योकि गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को ईलाज हेतु दिल्ली एम्स या निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है।
उन्होनें यूपी में रायबरेली व गोरखपुर में एम्स होने के बाद भी यूपी के काफी संख्या में लोग एम्स ,दिल्ली में ईलाज कराने आते है। जिसमें सबसे ज्यादा वेस्ट यूपी के होते है।उन्होंने कहा यूपी एक बडा राज्य है। इसलिए यहां पर एक एम्स की सख्त जरूरत है।इससे दिल्ली का भार काफी कम हो सकेगा। उन्होने पूरे देश से दिल्ली एम्स में आने वाले मरीजों का व्या्ैरा भी पेश किया।
डा. वाजपेयी ने कहा कि मेरठ का मेडिकल कॉलेज काफी पुराना है। यहां पर मरीजों का ओवरलोड रहता है। रोजाना हजारों मरीजाों ओपीडी होती है। गंभीर मरीजो को बैड मिलने में काफी परेशानी होती है। मेडिकल में सुविधाओ का आभाव है। मेडिकल में कई सुपर स्पेशियलिटी विभाग में डाक्टरों के पद खाली पडे है। पुरानी हो चुकी मशीने आधुनिक निदान में सक्षम नहीं है। ऐसे में मेडिकल रेेफरल सैंटर बंन कर रह गया है।
उन्होंने कहा आज सच्चाई यह है कि कैंसर , ह्दय रोग, श्रवसन रोग ,न्यूरोलॉजी ,जटिल सर्जरी या उच्चस्तरीय ईलाज के नाम पर भी मरीजों को दिल्ली एम्स रैफर या प्राइवेट नर्सिग होम पर निर्भर रहना पड़ता है।
राज्यसभा में बोलते हुूए उन्होेंने कहा जब हरियाणा के फरीदाबाद के ग्राम फतेहपुर बिल्लोच में एम्स का तीस बैड का कम्यूनिटी स्वास्थ्य केन्द्र और बल्लभगढ में कार्यरत एम्स के स्वास्थ्य केन्द्र में नय वार्ड बन सकता है। तो मेरठ में क्याें नहीं ।

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