बागपत डीएम का भाजपा को खुश करने के लिए संविधान में छेड़छाड़ करना आपराधिक कृत्य - शाहनवाज़ आलम

पार्क में लगी प्रस्तावना की प्रतिलिपि से समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्दों को हटाने पर मुकदमा करने की दी चेतावनी

कांग्रेस नेताओं ने बागपत प्रशासन से मिलकर दिया ज्ञापन, कहा दोनों शब्द तत्काल जोड़े जाएं

बागपत, 7 फरवरी 2026. कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने बड़ौत में निर्मित संविधान पार्क में लगायी गई संविधान की प्रस्तावना की प्रतिलिपि से समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्दों के हटाए जाने के ख़िलाफ़ बागपत प्रशासन को ज्ञापन देकर गलती सुधारते हुए तत्काल दोनों शब्दों को जोड़ने की माँग की है. उन्होंने ऐसा नहीं करने पर पार्क का उद्घाटन करने वाले डीएम अस्मिता लाल, राज्यमंत्री केपी मलिक और बड़ौत नगरपालिका चेयरमैन अश्वनी तोमर के ख़िलाफ़ कोर्ट जाने की भी चेतावनी दी है. 

ज़िले के कांग्रेस नेताओं के साथ शाहनवाज़ आलम ने डीएम की अनुपस्थिति में एडीएम शिवनारायण सिंह को ज्ञापन दिया. ज्ञापन में कहा गया है कि संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्दों को हटाया जाना संविधान के साथ छेड़छाड़ का अपराध है. जिसपर राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) की धारा 2 के तहत मामला दर्ज होता है, जिसमें 3 साल तक की जेल या जुर्माने का प्रावधान है। 

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में डीएम अस्मिता लाल भ्रामक बयान दे रही हैं कि पार्क में लगी संविधान की प्रतिलिपि संविधान की मौलिक प्रति पर आधारित है. शाहनवाज़ आलम ने कहा कि डीएम का बयान 3 तथ्यों के आधार पर भ्रामक और संविधान विरोधी है. 

1- केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य के मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल 1973 को दिए ऐतिहासिक फ़ैसले में मौलिक ढांचे के सिद्धांत को स्थापित करते हुए स्पष्ट किया था कि सरकार के पास अनुच्छेद 368 के तहत संविधान में संशोधन करने की शक्ति तो है लेकिन प्रस्तावना में संसद भी बदलाव नहीं कर सकती. 

2- इंदिरा गांधी सरकार ने 1976 में संविधान का 42 वां संशोधन करके प्रस्तावना में समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्दों को जोड़ा था. लेकिन यह संशोधन 1973 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद किया था. इसीलिए संशोधन के बावजूद प्रस्तावना में तारीख़ 26 नवंबर 1949 ही दर्ज है. इसीलिए 42 वें संविधान संशोधन के बाद भी संविधान की प्रस्तावना की नवैयत हमेशा मौलिक ही मानी जाती है. 

3- 27 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्दों को हटाने की याचिका को ख़ारिज कर दिया था. इसलिए भी डीएम  अस्मिता लाल का यह कृत्य सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है. 

कांग्रेस नेता ने कहा कि बागपत डीएम यह भूल रही हैं कि उनकी प्रतिबद्धता संविधान के प्रति है ना कि आरएसएस और भाजपा के प्रति जो संविधान से समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों को हटाने की साज़िश करते रहे हैं. 

कांग्रेस नेता हेमंत प्रधान ने कहा कि संविधान में छेड़छाड़ के इस अपराध को इलाहाबाद हाईकोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए. अगर कोर्ट स्वतः संज्ञान नहीं लेती है तो इस मामले पर कोर्ट में डीएम, मंत्री और नगरपालिका चेयरमैन के खिलाफ याचिका दायर की जायेगी.

इस अवसर पर कांग्रेस ज़िला अध्यक्ष लव कश्यप, शहर अध्यक्ष राम हरि पवार, पूर्व मंत्री ओमवीर तोमर, अल्पसंख्यक कांग्रेस निवर्तमान ज़िला अध्यक्ष इमरान इदरीसी, सरफ़राज़ मलिक, वसीम अहमद, अजेंद्र बली आदि मौजूद रहे.

No comments:

Post a Comment

Popular Posts