आरएसएस के शताबब्दी वर्ष पर शहर में हिंदु सम्मलनों का आयोजन
सनातन धर्म की रक्षा का दिया संदेश, कहा- सनातन बचेगा तभी विश्व बचेगा
मेरठ। रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विराट हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में हिंदू और सनातनी समाज के लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्र, संस्कृति और सनातन मूल्यों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
ब्रह्मपुरी क्षेत्र में आयोजित विराट हिंदू परिवार सम्मेलन में 21 कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया। साथ ही 501 कलशों की भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें सभी महिलाएं पीले वस्त्र धारण कर शामिल हुईं। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता क्षेत्रीय छात्रावास प्रमुख अनिल ने आरआरएस के 100 वर्षों के संघर्ष और यात्रा पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने संघ के सामाजिक और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों की चर्चा की।
मोबाइल से दूर रखने के साथ धर्म -संस्कार देने की अपील
डॉ. भीमराव आंबेडकर कन्या इंटर कॉलेज, सुभाष नगर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में बच्चों ने देशभक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि महंत शिवदास महाराज और मुख्य वक्ता प्रांत प्रचारक अनिल ने पंच परिवर्तन और हिंदू संस्कृति के 16 संस्कारों पर विचार रखे। उन्होंने माताओं से बच्चों को मोबाइल से दूर रखने और धर्म-संस्कार देने की अपील की। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ हुआ।सूरजकुंड पार्क में भावविभोर करने वाली प्रस्तुतियां
सूरजकुंड पार्क में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी को भावविभोर कर दिया। मुख्य वक्ता अरूण पाञ्चजन्य ने आरआरएस के संघर्ष और देश के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डालते हुए सनातन धर्म और राष्ट्र के लिए एकजुट रहने का संदेश दिया।
बुढ़ाना गेट जिमखाना मैदान में सनातन और स्वदेशी का संदेश
बुढ़ाना गेट स्थित जिमखाना मैदान में आयोजित सम्मेलन में बच्चों ने हिरण्यकश्यप और राम मंदिर पर आधारित प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया। मुख्य वक्ता आचार्य प्रमोद ने युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई और पंच परिवर्तन के साथ स्वदेशी अपनाने की अपील की। मुख्य अतिथि स्वामी कृष्णानंद महाराज ने कहा कि “सनातन बचेगा तभी विश्व बचेगा”, और सनातन संस्कृति की निरंतरता पर बल दिया।इन सभी आयोजनों के माध्यम से समाज को संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रहित के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।



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