उत्तर प्रदेश का बजट जनकल्याण का बुनियादी ढांचा
सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट राज्य के आर्थिक इतिहास में एक युगांतरकारी अध्याय के रूप में उभरा है। 9,12,696.35 करोड़ रुपये का यह विशाल बजट न केवल राज्य की बढ़ती आर्थिक शक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह अंत्योदय और सर्वांगीण विकास के संकल्प का मूर्त रूप है। यह बजट प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में बड़ा सोपान है, जिसमें वित्तीय अनुशासन और समावेशी विकास का अद्भुत संतुलन दिखाई दे रहा है। बिना किसी नए कर के बोझ के प्रस्तुत किया गया यह बजट राजकोषीय घाटे को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर रखते हुए राजस्व अधिशेष (रिवेन्यू सरप्लस) की स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है, जो उत्तर प्रदेश की सुदृढ़ होती अर्थव्यवस्था का परिचायक है।
कृषि प्रधान राज्य होने के नाते, बजट का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 9 प्रतिशत, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए समर्पित किया गया है। सरकार ने न केवल पारंपरिक खेती को आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखा है, बल्कि किसानों को उद्यमी बनाने के लिए कृषि विपणन और कृषि-निर्यात हब की स्थापना पर बल दिया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को प्रभावी ढंग से लागू करने और सिंचाई परियोजनाओं, विशेषकर जल संसाधन विभाग के माध्यम से नहरों के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त धन आवंटित किया गया है। गन्ना किसानों के लिए चीनी मिलों के नवीनीकरण और समयबद्ध भुगतान की व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, दुग्ध विकास और मत्स्य पालन के क्षेत्र में नीली क्रांति और श्वेत क्रांति को नए आयाम देने के लिए विशेष अनुदान का प्रावधान है, जो सीधे तौर पर सीमांत किसानों की आय में वृद्धि करेगा।
देश की आधी आबादी, महिला सशक्तिकरण को इस बजट की अंतरात्मा कह सकते है। सरकार ने मिशन शक्ति को और विस्तार देते हुए महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और सम्मान के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है। कन्या सुमंगला योजना और सामूहिक विवाह योजना के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जिसमें प्रति जोड़ा सहायता राशि को बढ़ाकर एक लाख रुपये करना ऐतिहासिक फैसला है।
इस बजट में मेधावी छात्राओं को डिजिटल युग से जोड़ने और उनकी शिक्षा को सुगम बनाने के लिए रानी लक्ष्मीबाई योजना के अंतर्गत स्कूटी वितरण का प्रावधान सराहनीय क्रांतिकारी कदम है। ग्रामीण क्षेत्रों में लखपति दीदी योजना और वुमेन बीपीओ की स्थापना से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र होंगी, बल्कि वे तकनीकी क्षेत्र में भी प्रदेश का नेतृत्व कर सकेंगी। महिला एवं बाल विकास के माध्यम से पोषण स्तर सुधारने हेतु आंगनवाड़ी केंद्रों का सुदृढ़ीकरण भी बजट की प्राथमिकता में शामिल है।युवा शक्ति को केंद्र में रखते हुए बजट ने दस लाख नए रोजगार सृजन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। जो बेरोजगारी की दिशा में प्रशंसनीय पहल है। शिक्षा क्षेत्र के लिए कुल बजट का 12.4 प्रतिशत आवंटन इस बात का प्रमाण है कि सरकार ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण के प्रति गंभीर है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के बुनियादी ढांचे को ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से आधुनिक बनाया जा रहा है। कौशल विकास मिशन के तहत युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुसार प्रशिक्षित करने के लिए आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों के उन्नयन हेतु भारी निवेश किया जा रहा है। स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए आईटी एवं स्टार्टअप नीति के तहत विशेष फंड की व्यवस्था की गई है, जिससे युवा अब नौकरी खोजने वाले के बजाय नौकरी देने वाले बनेंगे।बुनियादी ढांचे का विकास प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य को बदल रहा है। सड़कों, एक्सप्रेस-वे और सेतुओं के निर्माण के लिए बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आवंटित किया गया है। जिससे सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की पहुंच बड़े बाजारों तक आसान होगी। आवास और शहरी नियोजन के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना के विस्तार और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं ने शहरी जीवन स्तर को ऊंचा किया है। ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और सौर ऊर्जा जैसे अतिरिक्त स्रोतों को बढ़ावा देने से प्रदेश बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। साथ ही, सर्वविदित है कि अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे सांस्कृतिक केंद्रों के विकास और पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने से राजस्व के नए स्रोत खुले हैं और स्थानीय रोजगार में वृद्धि हुई है।
स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करने के लिए कुल बजट का 6 प्रतिशत चिकित्सा एवं परिवार कल्याण के लिए रखा गया है। एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। 14 नए मेडिकल कॉलेज और एमबीबीएस सीटों में बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है।
जिला अस्पतालों में अत्याधुनिक आपातकालीन सेवाओं और ट्रॉमा सेंटरों की स्थापना से आपातकालीन चिकित्सा के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी। आयुष पद्धति, जिसमें आयुर्वेद, योग और होम्योपैथी को बढ़ावा देकर सरकार पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय पर जोर दे रही है। इसके साथ ही, सामाजिक न्याय की अवधारणा को पुष्ट करते हुए अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के लिए छात्रवृत्ति और स्वरोजगार की योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया गया है।
लेखिका के ये अपने विचार है- इंदाैर







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