8 लाख की लूट की जांच के दौरान पुलिस के हाथ लगा अरबों का काला कारोबार

 संगठित गिरोह ने ढाई वर्षों में 1600 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी

 पुलिस ने  ईडी-सीबीआई जांच की सिफारिश

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक लूट की मामूली सी दिखने वाली घटना ने पूरे देश के वित्तीय तंत्र को हिला देने वाले एक बड़े हवाला रैकेट का पर्दाफाश किया है। कमिश्नरेट पुलिस की सतर्कता से सामने आया कि यह महज लूट नहीं, बल्कि एक संगठित वित्तीय अपराध गिरोह है, जिसने पिछले ढाई वर्षों में 1600 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) से जांच कराने की सिफारिश कर रही है।

लूट की एफआईआर से खुला अरबों का राज पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने बताया कि 16 फरवरी को हुई आठ लाख रुपये की लूट की जांच के दौरान पुलिस को शक हुआ, क्योंकि पीड़ित लूट की घटना को ही नकार रहा था। गहराई से जांच करने पर पता चला कि पीड़ित मोहम्मद वासिद, शिवांग टेनरी के मालिक महफूज के लिए काम करता है। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि महफूज और उसके करीबियों के 12 बैंकों में कुल 68 खाते हैं, जिनमें पिछले दो वर्षों में करीब 1600 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। 

हवाला का जटिल जाल

आरोपी महफूज ने जीएसटी से छूट पाने के लिए 'एपीएमसी सर्टिफिकेट' ले रखा था, जिसमें उसने फर्म को एग्रीकल्चर क्षेत्र में काम करने वाली बताया था। रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार 10 लाख से अधिक की नकदी निकासी पर 'एसटीआर' (Suspicious Transaction Report) जनरेट होनी चाहिए थी, लेकिन इस गिरोह ने सभी नियमों को ताक पर रखा। यह पैसा कहां से आ रहा था और इसका उपयोग कहां हो रहा था, यह अब जांच का विषय है।

पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई

लूट कांड को सुलझाते हुए पुलिस ने मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान समेत चार लुटेरों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य आरोपियों यासीन और मुजाहिद को मुठभेड़ में पैर में गोली लगने के बाद पकड़ा गया। बदमाशों के पास से 11 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। पुलिस आयुक्त ने बताया कि मुख्य आरोपी महफूज फिलहाल फरार है और पूछताछ में कोई सहयोग नहीं कर रहा है। पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए इनकम टैक्स, जीएसटी और ईडी को पत्र लिखा जा रहा है।

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