शायरी की रात, शब्दों की बरसात ‘संगीतम 2026’ में कवि महफ़िल ने रचा इतिहास

मेरठ। शोभित विश्वविद्यालय में आयोजित सांस्कृतिक महापर्व “संगीतम 2026 – ऊर्जा का उत्सव” के दूसरे दिन परिसर साहित्य, संवेदना और संगीत के अनुपम संगम से सराबोर दिखाई दिया। दिनभर विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच जिस कार्यक्रम ने सबसे अधिक प्रभाव डाला, वह रही देर शाम सजी भव्य कवि महफ़िल, जहाँ शब्दों ने दिलों पर दस्तक दी और शायरी ने आत्मा को छू लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत ऊर्जावान फ्लैश मॉब से हुई। जहाँ योग विद्यार्थियों ने अनुशासन और तालमेल का अद्भुत प्रदर्शन कर वातावरण को जोश से भर दिया। एग्री-डांस, बायोटेक डांस, फूड चैलेंज, बॉलीवुड फ्यूजन और रैप प्रतियोगिताओं ने युवाओं की रचनात्मकता और अभिव्यक्ति को नई ऊँचाइयाँ दीं। शास्त्रीय एकल नृत्य ने भारतीय परंपरा की गरिमा को मंच पर जीवंत कर दिया।

जब शायरी बनी शाम की सरताज

काव्य संध्या में देश के प्रतिष्ठित शायरों ने अपने शब्दों से ऐसा जादू रचा कि पूरा सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा।

अज़हर इक़बाल ने बदलते सामाजिक मूल्यों पर मार्मिक टिप्पणी करते हुए कहा—

“जाने वो बच्चे कहां किन रास्तों पर खो गए,

जो बड़े बूढ़ों को जाते थे नमन करते हुए।”

और प्रेम की परिभाषा को नई ऊँचाई देते हुए सुनाया—

“प्रेम में संपूर्ण हो जाने का मतलब है यही,

कृष्ण हो जाए अगर मीरा भजन करते हुए।”

हिमांशी बाबरा की संवेदनशील पंक्तियों ने भावनाओं की गहराई को स्वर दिया—

“दिल ऐसे मुब्तला हुआ तेरे मलाल में,

ज़ुल्फ़ें सफ़ेद हो गईं उन्नीस साल में।”

“इक बार मुझ को अपनी निगहबानी सौंप दे,

उम्रें गुज़ार दूँगी तेरी देख-भाल में।”

रविंदर कुमार सुकून ने समाज की विडंबनाओं को यूँ अभिव्यक्त किया—

“सफ़र की राहतें ठुकरा रहे हैं,

हम अपने साथ चलते जा रहे हैं।”

“ज़मीं का ग़म नुमाया हो गया है,

नए पेड़ों पे पत्थर आ रहे हैं।”

बालमोहन पाण्डेय ने व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक मौन पर प्रश्न उठाया—

“हम जो कल थे वही हैं आज मियाँ,

आप फ़रमाइये मिज़ाज मियाँ।”

“हम ने बाहर निकल के देख लिया,

कुछ नहीं बोलता समाज मियाँ।”

यासिर ईनाम ने प्रेम और सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त संदेश दिया—

“आप नफ़रत को मुहब्बत से बदल सकते हैं,

ये वो सिक्के हैं जो हर दौर में चल सकते हैं।”

“पेड़ कटने से ही बनती है कोई बैसाखी,

मैं गिरूंगा तो कई लोग संभल सकते हैं।”

इन पंक्तियों ने केवल मनोरंजन नहीं किया, बल्कि विचार, संवेदना और आत्ममंथन की गहरी लकीरें भी खींच दीं।

‘आवारा बैंड’ ने देर रात तक बांधा समां

रात्रि के मुख्य आकर्षण ‘आवारा बैंड’ की सजीव प्रस्तुति ने युवाओं के उत्साह को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया। मधुर धुनों और सशक्त संगीत के साथ पूरा परिसर रोशनी और उमंग से जगमगा उठा। विद्यार्थी देर रात तक संगीत की लय पर झूमते रहे।

“संगीतम 2026” का यह दूसरा दिन इस बात का प्रमाण बना कि शोभित विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति के संवर्धन का भी सशक्त मंच है।

शब्दों की यह शाम लंबे समय तक स्मृतियों में गूंजती रहेगी—क्योंकि यहाँ शायरी केवल सुनाई नहीं गई, बल्कि महसूस की गई

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