शिक्षा के नाम बजट 2026: दिशा सही, गति पर्याप्त?

डॉ. जितेन्द्र सिंह गोयल 

केंद्रीय बजट 2026-27 में शिक्षा क्षेत्र को ₹1,39,289.48 करोड़ का आवंटन देकर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा को अब केवल सामाजिक उत्तरदायित्व नहीं बल्कि राष्ट्र के दीर्घकालिक आर्थिक, तकनीकी और नवाचार-आधारित विकास की मुख्य धुरी के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ यह आवंटन पिछले वर्ष की तुलना में 8.27 प्रतिशत अधिक है और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बजट में उच्च शिक्षा संस्थानों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को ₹3,709 करोड़, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) को ₹12,123 करोड़, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (NITS) को ₹6,260 करोड़ तथा केंद्रीय विश्वविद्यालयों को ₹17,440 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

 जिससे शैक्षणिक अवसंरचना, गुणवत्ता सुधार, शोध सुविधाओं और छात्र सहायता कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी; इसके अतिरिक्त पीएम रिसर्च फेलोशिप के लिए ₹600 करोड़, पीएम रिसर्च चेयर के लिए ₹200 करोड़ तथा वर्ल्ड क्लास इंस्टीट्यूशन प्रोग्राम के लिए ₹900 करोड़ का आवंटन भारत में अनुसंधान पारिस्थितिकी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। शिक्षा में डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के एकीकरण को बजट 2026 की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है, जिसके अंतर्गत एआई शिक्षा केंद्र ऑफ एक्सीलेंस हेतु ₹100 करोड़ तथा तीन नए एआई केंद्रों की स्थापना का प्रस्ताव है, जिससे एआई संचालित पाठ्यक्रम विकास, शोध परियोजनाएँ और कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलेगा; साथ ही 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स की स्थापना से डिजिटल स्टोरीटेलिंग, एनिमेशन, गेमिंग और मीडिया आधारित कौशलों में युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें भविष्य के रोजगार बाजार के लिए तैयार किया जाएगा।

 'वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन' योजना के लिए ₹2,200 करोड़ का प्रावधान छात्रों, शिक्षकों और शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स और शैक्षणिक संसाधनों तक समान और सुलभ पहुँच प्रदान करेगा, जो शोध गुणवत्ता और अकादमिक नवाचार को नई दिशा देगा, वहीं औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़ी पाँच यूनिवर्सिटी टाउनशिप की स्थापना शिक्षा को उद्योग और रोजगार से जोड़ने का एक दूरदर्शी प्रयास है, जिससे विश्वविद्यालयों और स्थानीय उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ेगा। बजट का एक अत्यंत सराहनीय और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पक्ष प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए छात्रावास स्थापित करने का प्रस्ताव है, विशेषकर उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सराहा है, क्योंकि इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बालिकाओं की उच्च शिक्षा तक पहुँच बढ़ेगी और असुरक्षित आवागमन, लंबी दूरी, सीमित आवास सुविधाओं तथा सामाजिक प्रतिबंधों जैसी व्यावहारिक बाधाओं को कम किया जा सकेगा। 

 उल्लेखनीय है कि यद्यपि भारत में स्कूल स्तर पर लड़कियों के नामांकन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, फिर भी उच्च शिक्षा में निरंतरता अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उत्तर प्रदेश को कुल ₹4.26 लाख करोड़ का हिस्सा प्राप्त हुआ है, जिसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास, शैक्षणिक अवसंरचना के विस्तार, सेमीकंडक्टर पार्क और औद्योगिक कॉरिडोर जैसी योजनाएँ शामिल हैं, जो न केवल शिक्षा बल्कि रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास को भी गति देंगी। बजट 2026 में ऑनलाइन लर्निंग, हाइब्रिड कक्षाओं और डिजिटल पुस्तकालयों जैसे प्रयासों के माध्यम से डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है, किंतु इसके साथ ही डिजिटल असमानता की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है, विशेषकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता और शिक्षकों की डिजिटल साक्षरता को सुनिश्चित किए बिना डिजिटल शिक्षा की सफलता अधूरी रहेगी।



इसके साथ-साथ व्यावसायिक और कौशल-आधारित शिक्षा पर बल देना समय की आवश्यकता है; यदि स्कूली स्तर से ही कौशल विकास को कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, हस्तनिर्मित उत्पादों, सूचना प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र जैसी स्थानीय आर्थिक आवश्यकताओं से जोड़ा जाए, तो यह युवाओं को स्थानीय रोजगार अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अंततः, बजट 2026-27 की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिक्षा को अल्पकालिक व्यय के बजाय दीर्घकालिक निवेश के रूप में किस हद तक लागू किया जाता है; यद्यपि शिक्षा बजट में वृद्धि हुई है, फिर भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के 6 प्रतिशत जीडीपी लक्ष्य से अभी दूरी बनी हुई है, और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में शिक्षक-घाटे, डिजिटल विभाजन और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है, क्योंकि यदि नीतिगत दूरदृष्टि, पर्याप्त वित्तीय संसाधन और जमीनी स्तर पर मजबूत क्रियान्वयन के बीच संतुलन बना रहा, तो केंद्रीय बजट 2026-27 शिक्षा को केवल डिग्री प्रदान करने वाली व्यवस्था से आगे बढ़ाकर नवाचार कौशल रोजगार और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त नींव बनाने में निर्णायक भमिका निभा सकता है।

असिस्टेंट प्रोफेसर शिक्षा विभाग चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ

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