1633 कछूवों को गंगा नदी में छोड़ा गया
विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर भीकुंड वेटलैंड स्थित वॉच टावर परिसर कार्यक्रमों का आयोजन
मेरठ। विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर सोमवार को भीकुंड वेटलैंड स्थित वॉच टावर परिसर में बर्ड वॉचिंग, जैव विविधता संरक्षण एवं जन-जागरूकता से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आर्द्रभूमियों के संरक्षण, प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों की महत्ता तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति जनसामान्य में जागरूकता बढ़ाना रहा। इस दौरान 1633 कछूवों को गंगा नदी में छोड़ा गया।
इस अवसर पर प्रभागीय निदेशक डीएफओ वंदना फोगाट, ब्लॉक प्रमुख नितिन पोसवाल, जिला मंत्री सुनील पोसवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियांक भारती, वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय, ऑर्निथोलॉजिस्ट डॉ. रजत भार्गव, हरिमोहन मीणा (WWF) सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, पर्यावरण प्रेमी, मीडिया प्रतिनिधि एवं विभिन्न विद्यालयों के 300 से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे।बर्ड वॉचिंग एवं जैव विविधता जागरूकता कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत भीकुंड वॉच टावर से बर्ड वॉचिंग गतिविधि के साथ हुई। इस दौरान प्रतिभागियों ने प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों की अनेक प्रजातियों का अवलोकन किया। विशेषज्ञों द्वारा पक्षियों की पहचान, उनके प्राकृतिक आवास तथा आर्द्रभूमियों की पारिस्थितिकी में उनकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
भीकुंड वेटलैंड यूरेशिया देशों से हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले प्रवासी पक्षियों का एक प्रमुख आश्रय स्थल है। इस वर्ष अब तक का सबसे बड़ा बर्ड काउंट दर्ज किया गया, जिसमें 30 हजार से अधिक प्रवासी पक्षियों का समागम देखा गया। यह क्षेत्र 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास माना जाता है।प्रमुख रूप से देखी गई प्रजातियों में बार हेडेड गूस, लिटिल कॉर्मोरेंट, ब्राह्मणी, एग्रेट, किंगफिशर, ग्रे लेग गूस, सरस क्रेन एवं स्पून बिल्ड डक शामिल रहीं।इस अवसर पर विद्यार्थियों को रामसर साइट्स के महत्व की जानकारी दी गई तथा भीकुंड वेटलैंड को रामसर साइट घोषित किए जाने की मांग भी प्रतिभागियों द्वारा रखी गई।
गंगा नदी में कछुआ शावकों का पुनर्वास कार्यक्रम
कार्यक्रम के द्वितीय चरण में मखदुमपुर घाट पर मकदुमपुर टर्टल हैचरी में हैच किए गए कुल 1633 कछुआ शावकों को गंगा नदी में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया। यह पहल गंगा नदी के जैविक संतुलन को बनाए रखने एवं विलुप्तप्राय कछुआ प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रजाति अनुसार छोड़े गए शावकों का विवरण:
Batagur dhongoka – 41
Pangshura smithii – 944
Pangshura tentoria – 648
कुल – 1633 शावक
कछुए गंगा के पारिस्थितिक तंत्र में प्राकृतिक स्कैवेंजर की भूमिका निभाते हैं, जिससे नदी की स्वच्छता एवं जैव संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।
चित्रकला प्रतियोगिता एवं सम्मान समारोहवेटलैंड दिवस के अवसर पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।सीनियर विंग में स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल की मिशिका त्यागी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।जूनियर विंग में हस्तिनापुर पब्लिक स्कूल के रित्विक को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।अन्य 10 विद्यार्थियों को द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।कार्यक्रम में बर्ड आइडेंटिफिकेशन एवं फोटोग्राफी में उत्कृष्ट योगदान हेतु डॉ. रजत भार्गव को सम्मानित किया गया। सुनील पोसवाल को हस्तिनापुर की प्रकृति एवं सांस्कृतिक विरासत पर आधारित कविता “आओ चले हस्तिनापुर की ओर” तथा बूढ़ी गंगा पुनरोद्धार एवं शैक्षणिक योगदान हेतु विशेष सम्मान प्रदान किया गया।डॉ. रजत भार्गव द्वारा पक्षियों से संबंधित प्रश्नोत्तरी में भाग लेने पर शोभित विश्वविद्यालय के पांच विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया गया।
टर्टल हैचरी भ्रमण
कार्यक्रम के अंतिम चरण में अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने टर्टल हैचरी का भ्रमण किया, जहां कछुओं के संरक्षण, अंडों के सुरक्षित ऊष्मायन एवं शावकों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने की वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
अपने संबोधन में डीएफओ ने अतिथियों ने आर्द्रभूमियों को प्रकृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए इनके संरक्षण हेतु सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जन-जागरूकता कार्यक्रमों से समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होती है।




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