सैंट्रल मार्केट में दुकानों को बचाने के लिए 14 को आम सभा का आयोजन 

संयुक्त व्यावार संग समेत शहर के व्यापार के व्यापारी करेंगे शिरकत 

 आरटीआर एक्टीविस्ट पर लगाए गंभीर आरोप 

 मेरठ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अन्य अवैध दुकानों के ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद  व्यापारी अपने प्रतिष्ठान को बचाने के लिए नये -नये रास्ते अपना रहे है। जिससे उनका रोजगार प्रभावित होने से बच सके। लेकिन की इसकी संभावना कम ही दिखाई दे रही है। बुधवार को   

व्यापार बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रेस कांफ्रेंस की गई जिसमे सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1478 भूखंड ध्वस्तीकरण के विरोध में समस्त शास्त्री नगर जाग्रति विहार के व्यपारियो ने ध्वस्तीकरण की कार्यवाई को लेकर शास्त्री नगर व जाग्रति विहार के समस्त व्यपारियों  कि  14 फरवरी   यानी शनिवार को दोपहर 12.00 बजे आम सभा का आह्वान किया और इस आम सभा में सभी व्यपारी सामुहिक निर्णय लेगे। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये आदेश में सभी व्यपारियो की जीविका का एक बड़ा सवाल है आने वाला भविष्य अंधकार में है हमारा । उन्होंने सरकार से राहत देने की मांग की। इस आम सभा में शास्त्री नगर जागृति विहार के समस्त व्यापारी, दोनों संयुक्त व्यापार संघ मेरठ , शहर के प्रमुख व्यापार मंडल को भी आमंत्रित किया जाएगा । 

 इस मौके पर पार्षद बिल्लू ने  आरटीआई एक्टीविस्ट लोकेश कुमार खुराना पर आरोप लगाते हुए कहा  जिस स्थान पर आरटीआई एक्टीविस्ट लोकेश खुराना की दुकान है। वहां नजदीक सरकारी पटरी खसरा संख्या 4566 और 4567 पर निर्मित  लगभग 225 दुकानों  से निगम द्वारा नियमित किराया वसूला जा रहा है। इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका संख्या 1210/ 2024 दाखिल की गयी थी। जिसे इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि संबधित निर्माण लगभग 60 साल पुराना है तथा उसे ध्वस्त कर सर्वाजनिक सड़क को मूल स्वरूप में बहाल करना व्यवहारिक नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट मे एसएलपी सिविल संख्या 54508/2024 पर  7 मार्च 2025   को सर्वोच्च न्यायालय ने पारित  आदेश द्वारा भी हाई कोर्ट के निर्णय में हस्तेक्षप करने से इंकार करते हुए याचिका का निरस्त कर दिया।  इसके विपरीत मेरठ की ही शास्त्री नगर आवासीय योजना में आवासीय भू-खंडो के भू -उपयोग परिवर्तन के उपरांत निर्मित सैट्रंल मार्केट के लगभग एक हजार से अधिक निर्माणों को सुप्रीम कोर्ट  द्वारा अपील संख्या 14604/2024एवं अवमानना याचिका संख्या 0877/2025 में 27 जनवरी को पारित आदेश द्वारा अवैध  घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया। 

 उन्होंने कहा किया कि दोनो परिस्थितियों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर यह तथ्य निर्वावाद रूप से स्पष्ट होता है कि भगत सिंह मार्केट  सार्वाजनिक सड़क की भूमि पर स्थित होने के बावजूद न केवल संरक्षित है बल्कि नगर निगम द्वारा उससे आर्थिक लाभ भी अर्जित किया जा रहा है।  उन्होंने कहा कि सैट्रंल मार्केट आवासीय भू-खंडों पर भू-उपयोग परिवर्तन के उपरांत विकसित किया गया है। तथापि उसे पूर्णत: अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया गया। दोनों ही प्रकरणों में राज्य एवं स्थानीय निकायों की भूमिका निर्णायक रही है किंतु विधिक परिणाम पूर्णत: भिन्न है। 

सतीश गर्ग ने आरोप लगाया है। आवास विकास के अधिकारी सरकार को गलत जानकारी दे रहे है। उन्होंने आरोप लगाया । हापुड़ रोड़ पर काफी अवैध निर्माण हो चुके है। लेकिन निशाना सैँटल मार्केट को बनाया जा रहा है। उन्होने बताया जिन दुकानों को अवैध बताया जा रहा है। वहां तीस से चालीस साल पुरानी दुकाने है। जब हापुड़ अडडे भगत सिंह मार्केट सरकारी जमीन को छूट दी जा सकती है। तो सैट्रल मार्केट की दुकानों को क्यों नहीं । उन्होने बताया पत्र की प्रति मुख्य सचिव्र,आवास आयुक्त , मंडलायुक्त,डीएम व उप आवास आयुक्त को भेजा जा रहा है।  

  इस दौरान व्यापारियों ने एक सुर में कहा व्यापारियों के दम पर प्रदेश में भाजपा की सरकार है। अगर सरकार व्यापारियों के साथ नहीं देती है। तो इस बार व्यापारी अपनी वोट से सरकार को जवाब देंगे। 

 इस मौके पर  व्यापार बचाओ संघर्ष समिति के संरक्षक सतीश गर्ग, संयोजक जितेंद्र अग्रवाल, वीरेंद्र शर्मा, नरेंद्र राष्ट्रवादी, महिपाल मलिक, संजीव पुंडीर, सतीश वर्मानी, प्रवीण शर्मा, एवम भारी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे ।

  सीएम योगी के पास है आवास एवं शहरी नियोजन मंत्रालय  विभाग 

बता दें कि आवास एवं शहरी नियोजन मंत्रालय यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास ही है। ऐसे में सवाल मेरठ के जनप्रतिनितधियोें की अनदेखी का ही है जो मुख्यमंत्री की टेबल तक इस मुद्दे को मजबूती से नहीं पहुंचा सके। हापुड़ रोड यानि आरटीओ के पुराने कार्यालय के इर्द गिर्द भी आवास एवं विकास की योजना संख्या-7 ही है, लेकिन यहां के अवैध निर्माण शायद परिषद की नजरों दूर हैं या फिर मामला कुछ ओर है। व्यापारियों का भी ये ही आरोप है कि सेंट्रल मार्किट में नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं, जबकि आरटीओ नाला रोड पर परिषद की कोई कार्रवाही नहीं हो रही। बता दें कि यहां अवैध अस्पताल से लेकर विशाल कमर्शियल बिल्डिंग बनकर  खड़ी हैं। कारखाने होने के कारण बड़े बड़े वाहन रिहायशी एरिया में मौत का सामान बनकर घूमते देखे जा सकते हैं। उधर भगत सिंह मार्किट को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि सेंट्रल मार्किट पर ध्वस्तीकरण के नोटिस भेजे जा रहे हैं तो हापड़ अड्डा स्थित सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनी अवैध भगत सिंह मार्किट कार्यवाही से दूर क्यों है। 

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