जलवायु परिवर्तन का संकट

इलमा अज़ीम 

जलवायु परिवर्तन ने पृथ्वी पर कई परिवर्तन कर दिए हैं। इनमें से कई परिवर्तन ऐसे हैं जिनसे हम वाकिफ नहीं हैं। बढ़ती गर्मी, बारिश के पैटर्न में बदलाव और कार्बन डाइऑक्साइड के ऊंचे स्तर से फसलों को होने वाला नुकसान हमें दिखाई देता है लेकिन जलवायु के परिवर्तन समूची खाद्य प्रणालियों को कितना प्रभावित कर रहे हैं, इसका जरा भी अंदाजा हमें नहीं है।
नया अध्ययन बताता है नाइट्रोजन चक्र परिवर्तन खाद्य उत्पादन, पानी की सुरक्षा, पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और जलवायु स्थिरता को गहरे तक प्रभावित कर रहा है। हम सभी जानते हैं कि नाइट्रोजन का संतुलित प्रवाह स्थिर पारिस्थितिकी तंत्र और अच्छी फसल के लिए आवश्यक है। अतिरिक्त नाइट्रोजन हवा और पानी में चला जाता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है और गर्मी बढ़ाने वाली ग्रीनहाउस गैसें बनती हैं। 

दूसरी ओर, नाइट्रोजन की सीमित उपलब्धता फसलों के विकास को धीमा करने के साथ-साथ खाद्य आपूर्ति को भी कम कर देती है। कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता नाइट्रोजन को प्रभावित करती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे समय तक नाइट्रोजन की कमी भविष्य की ग्रोथ और कार्बन स्टोरेज की क्षमता को कमजोर कर सकती है।

       वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में बताया कि जलवायु परिवर्तन नाइट्रोजन संतुलन में क्षेत्रीय अंतर को बढ़ा रहा है। इससे खाद्य असुरक्षित क्षेत्रों को ज़्यादा पैदावार के नुकसान और प्रदूषण के दबाव का सामना करना पड़ता है। सुदृढ़ नाइट्रोजन मैनेजमेंट पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करता है, साथ ही खाद्य उत्पादन में भी मदद करता है। कुशल उर्वरक का उपयोग नाइट्रोजन उपयोग दक्षता में सुधार करता है।

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