बसंत पंचमी पर हुई वर्षा फसलों के लिए लाभकारी
मेरठ। बसंत पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देवी सरस्वती का प्रकट उत्सव मनाया जाता है आज से शीत युद्ध का प्रभाव धीरे-धीरे कम होकर बसंत ऋतु की तरफ मौसम परिवर्तित होता है लेकिन आज सुबह से हो रही वर्षा के कारण जहां एक बार फिर सर्दी लौटती नजर आ रही है वहीं यह बारिश फसलों तथा किसानों के लिए खुशी का पैगाम लेकर आई है
वैसे तो बसंत पंचमी के दिन विद्या दाहिनी मां सरस्वती का पूजन किया जाता है इस दिन साहित्य कला शिक्षा व गायन क्षेत्र से जुड़े लोग विशेष रूप से इस दिन मां शारदे को विधिवत पूजन करते हैं बसंत पंचमी का दिन श्रम सिद्धि अबूझ मुहूर्त वाला होता है इस दिन मंगल कार्य का शुभारंभ किया जा सकता है आज से प्राकृतिक सौंदर्य भी निखरना शुरू हो जाता है लेकिन अचानक हुई बारिश के कारण जहां जनजीवन अस्त व्यस्त हुआ है वहीं यह वर्षा फसलों विभिन्न प्रकार की सब्जियां तथा फल फूल के लिए लाभकारी साबित होगी
रबी की फसल पर बारिश का प्रभाव
रबी की फसलों के लिए सीमित मात्रा में वर्षा सामान्यतः लाभकारी होती है, क्योंकि इससे मिट्टी में नमी बढ़ती है और सिंचाई की आवश्यकता कम होती है। लेकिन अधिक या लगातार वर्षा होने पर खेत में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे पौधों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं। इससे गेहूं, सरसों, चना एवं मसूर जैसी फसलों की वृद्धि प्रभावित होती है और उपज में कमी आ सकती है।
जनवरी में वर्षा का सब्जी की फसल पर प्रभाव
जनवरी माह में वर्षा सब्जी की फसलों के लिए मिश्रित प्रभाव डालती है। हल्की वर्षा नमी प्रदान कर पौधों की बढ़वार में सहायक होती है, लेकिन अधिक नमी से टमाटर, मटर, गोभी, फूलगोभी और आलू जैसी फसलों में रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है। अधिक नमी के कारण जड़ों में सड़न और पत्तियों के झुलसने की समस्या भी देखी जाती है।
जनवरी में हो रही वर्षा का गन्ना, गेहूं एवं अन्य फसलों पर प्रभाव
जनवरी में हो रही वर्षा से गन्ने की फसल में प्रारंभिक वृद्धि में कुछ हद तक लाभ हो सकता है, किंतु जलभराव की स्थिति में पौधों की जड़ें प्रभावित होती हैं। गेहूं में अत्यधिक नमी के कारण जड़ सड़न, पौधों का गिरना (लॉजिंग) तथा दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अन्य रबी फसलों में भी वृद्धि दर धीमी हो जाती है और उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
जनवरी में हो रही वर्षा से फसलों पर लगने वाले रोग
लगातार नमी और ठंडे मौसम के कारण फफूंदजनित रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है। इस दौरान झुलसा रोग, रतुआ रोग, पाउडरी मिल्ड्यू तथा जड़ सड़न जैसी समस्याएँ अधिक देखने को मिलती हैं। ये रोग पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्षमता को कम कर देते हैं, जिससे फसल की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित होता है।
जनवरी में हो रही वर्षा के कारण सब्जी तथा फल-फूल की फसलों पर लगने वाले रोग
जनवरी में अधिक वर्षा और नमी के कारण सब्जी एवं फल-फूल की फसलों में अगेती एवं पछेती झुलसा, पत्तियों का धब्बा रोग, फल सड़न तथा फूल झड़ने की समस्या बढ़ जाती है। अधिक नमी परागण प्रक्रिया को भी प्रभावित करती है, जिससे फल और फूलों की संख्या कम हो सकती है। रोगों से बचाव के लिए खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था, संतुलित पोषण और समय पर रोग नियंत्रण उपाय आवश्यक हैं।


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