कामना प्रसाद को समाज सेवा के लिए पहला डॉ. मेराजुद्दीन अहमद अवॉर्ड मिला
‘समाज में हर किसी को इंसान का दर्जा देकर आप एक बेहतर समाज बना सकते हैं : प्रोफेसर अबु सुफ़यान इस्लाही
डॉ. मेराजुद्दीन अहमद इस शहर की साहित्यिक, राजनीतिक और सामाजिक विरासत का हिस्सा थे: प्रो असलम जमशेदपुरी
आज मेरठ को जो गंगाजल की सप्लाई मिल रही है, वह मेराज साहब के ही कारण है : लक्ष्मीकांत वाजपेयी
उर्दू डिपार्टमेंट और सैफ फाउंडेशन ने मिलकर पहला डॉ. मेराजुद्दीन अहमद मेमोरियल लेक्चर और अवॉर्ड आयोजित किया
मेरठ। ‘मज़हब हमें नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ यह अल्लामा इकबाल की कविता की एक लाइन है जो राष्ट्रीय एकता का संदेश देती है। अल्लामा इकबाल की कविता में राष्ट्रीय एकता और भारत की सुंदरता का जो चित्रण है, वह उर्दू शायरी के दूसरे कवियों में बहुत कम देखने को मिलता है। इसी तरह, इब्न खल्दुन ने भी अपनी किताब “मुकद्दम इब्न खल्दुन” में सामाजिक न्याय और समानता के कॉन्सेप्ट पेश किए हैं जो बहुत ज़रूरी हैं। बेहतर सामाजिक मूल्यों के लिए हम इस किताब से बहुत फ़ायदा उठा सकते हैं। ये शब्द थे मशहूर विद्वान प्रोफ़ेसर अबु सुफ़यान इस्लाही के, जो चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के उर्दू डिपार्टमेंट और सैफ़ फ़ाउंडेशन के साथ मिलकर अटल सभागढ़ में आयोजित पहले डॉ. मेराजुद्दीन अहमद मेमोरियल लेक्चर “सामाजिक न्याय और समानता" में मुख्य व्याख्यान दे रहे थे।
उन्होंने आगे कहा कि इस बारे में सर सैयद ने जो कहा है, वह भी हमारे सामने है कि भारत एक खूबसूरत दुल्हन की तरह है, जिसकी दो आँखें हैं। उन्होंने एक आँख को हिंदू और दूसरी को मुसलमान बताया है। कुरान भी यही संदेश देता है कि बिना किसी धर्म और राष्ट्रीयता के भेदभाव के, दुनिया के सभी देश अल्लाह का समाज हैं। अब अगर हम समाज में किसी को बुरे इंसान का दर्जा नहीं देंगे, तो यह उसके साथ नाइंसाफ़ी होगी। इसी आधार पर कहा गया है कि जिसने एक बेगुनाह इंसान को बचाया, उसने पूरी इंसानियत को बचाया। एक बेहतर समाज के लिए औरतों की इज़्ज़त भी बहुत ज़रूरी है। हम समाज में हर किसी को इंसान का दर्जा देकर एक बेहतर समाज बना सकते हैं। बहुत कम लोग मिलते हैं जिन्होंने इस भारत को सर सैयद जितना खूबसूरत बनाया हो, लेकिन इन्हीं कुछ लोगों में मेराजुद्दीन साहब भी थे। मेराज साहब को साहित्य के साथ-साथ इंसानों से भी प्यार था।
इससे पहले, प्रोग्राम की शुरुआत मौलाना अनीसुर्रहमान कासमी ने पवित्र कुरान की तिलावत से की। बाद में, सभी मेहमानों का फूलों से स्वागत किया गया। अध्यक्षता प्रो. असलम जमशेदपुरी ने की। मेरठ शहर के विधायक रफीक अंसारी, शोभित यूनिवर्सिटी के चांसलर कुंवर शेखर विजेंद्र, राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी और मशहूर शायर और शिक्षाविद डॉ. नवाज देवबंदी खास मेहमानों के तौर पर शामिल हुए। मुख्य भाषण अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अबु सुफ़यान इस्लाही ने दिया। स्वागत भाषण डॉ. शादाब अलीम और अमीरा अहमद ने दिया। प्रोग्राम का संचालन डॉ. अफाक अहमद खान ने किया और धन्यवाद समारोह बदर महमूद ने किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. मेराजुद्दीन अहमद पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई। इस मौके पर अमीरा अहमद ने कहा कि मेरे पापा हमेशा कहते थे कि हमें दूसरों की चिंता करनी चाहिए। आज आप सबको देखकर लगता है कि हम अकेले नहीं हैं। मैंने बहुत कुछ पापा से ही सीखा है। जब वो काम करते थे, तो मौसम और समय उनके लिए कोई मायने नहीं रखते थे। चौधरी यशपाल सिंह ने कहा कि मेराज साहब से हमारा रिश्ता चौथी पीढ़ी में आ गया है। आज वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी बातें, उनकी यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी।
कार्यक्रम के दौरान, मशहूर समाजसेवी और जश्न ए बहार ट्रस्ट, नई दिल्ली की फाउंडर डॉ कामना प्रसाद को उनकी समाज सेवाओं के लिए पहला डॉ. मेराजुद्दीन अहमद अवॉर्ड भी दिया गया। अवॉर्ड लेने के बाद कामना प्रसाद ने कहा कि मेराज साहब जिस परिवार से थे, वो सदियों से साहित्यिक, अकादमिक और नैतिक ऊंचाइयों को रोशन करने वाला परिवार रहा है। मेरठ ने उर्दू को कई अहम नाम दिए हैं।
लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि मेराज साहब सिंचाई मंत्री थे। मेराजुद्दीन अहमद बिंदास लहजे वाले और सच्चे इंसान थे। आज मेरठ को जो गंगाजल की सप्लाई मिल रही है, वह मेराज साहब के ही कारण है। जब वह सड़क पर चलते थे, तो कभी सिर नहीं उठाते थे। आज मेरठ के लोग उनका जितना भी शुक्रिया अदा करें, कम है। कुंवर शेखर विजेंद्र ने कहा कि यहां बैठे सभी लोग मेराज साहब की मोहब्बत के धर्म हैं। वह सिर्फ एक मंत्री नहीं बल्कि एक महान शख्सियत थे।
डॉ. मेराजुद्दीन खुद गंगा-जमनी तहजीब की मिसाल थे। रफीक अंसारी ने कहा कि मैं डॉ. मेराजुद्दीन के परिवार को बधाई देता हूं जिन्होंने उनकी याद में इतना खूबसूरत प्रोग्राम किया। अगर हमें सही मायने में सच्चा भारत देखना है, तो पूरा भारत यहां बैठा है। मेराज साहब की भाषा बहुत मीठी थी। वह उर्दू भाषा का इस्तेमाल करते थे। राजेंद्र शर्मा ने कहा कि मेराज साहब के किरदार से हम सभी वाकिफ हैं, लेकिन यह सच है कि वह सामाजिक न्याय और बराबरी की जीती-जागती मिसाल थे। हमें डॉ. मेराज के दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए। प्रोफेसर जमाल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि मैं इस मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं। मेराज साहब से प्यार करने वाले लोग उनकी मोहब्बत की वजह से यहां आए हैं। मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूं कि मेराज साहब सभ्यता, प्रेम और ईमानदारी की मिसाल थे। इस अवसर पर डॉ. आसिफ अली , डॉ. इरशाद स्यानवी, डॉ. अलका वशिष्ठ, फरहत अख्तर, श्री आर.के. भटनागर (पूर्व आईएएस) , कवि ईश्वर चन्द्र गम्भीर, कर्मेंद्र सिंह, श्री इमरान सिद्दीकी, इंजीनियर रिफत जमाली, जीशान अहमद खान, मुहम्मद नदीम, ईशा राणा, ज़ुबैर, हैदर, मुहम्मद शमशाद, सईद अहमद सहारनपुरी सहित शहर के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


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