अब छात्र इतिहास  को पढेंगे कामिक्स की तरह 

 शिक्षक ने छात्रों की मदद से इतिहास के पन्नों को बनाया डिजीटल 

 यूपीएससी अन्य प्रतियोगिता की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी को मिलेगा फायदा

 संजय वर्मा 

 मेरठ। इतिहास को याद करने के लिए शिक्षकों व छात्रों ने अनूठा तरीका खोल निकाला है। जिससे इतिहास को आसानी  से जाना जा सके। मेरठ के केन्द्रीय विद्यायल सिख लाइन के शिक्षक छात्रों की मदद से इतिहास के पन्नों को कामिक्स में बदल दिया है। आमतौर पर अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग या युवा या फिर कुछ छात्र जैसे ही इतिहास का जिक्र उनके सामने आता है तो  उन्हें डर सताने लगता है, लेकिन केंद्रीय विद्यालय पंजाब लाईन स्थित  के अध्यापक निरुपम गुप्ता ने छात्रों के लिए इस विषय को बेहद ही दिलचस्प बना दिया है। उन्होंने अनोखा प्रयोग किया जो कि काफी सफल भी साबित हो रहा है।  अब छात्र आनंद के साथ इतिहास को ना सिर्फ पढ़ रहे हैं बल्कि उसे जी भी रहे हैं। इतना ही नहीं इतिहास के अन्य विषयों को डिजीटल करने के प्रयास किए जा रहे है। इतिहास विषय को रोचक बनाने के लिए मेरठ के केंद्रीय विद्यालय के इतिहास के शिक्षक अनुपम के अनूठे नवाचार से स्टूडेटस भी गदगद हैं।    

   शिक्षक निरूपम गुप्ता ने बताया  एक सामान्य धारना है कि इतिहास एक नीरस विषय है, वे ऐसा नहीं मानते, इस धारणा को पूरी तरह गलत मानते हैं. इस विषय  के प्रति जो अरुची है उसे तोड़ने के लिए लिए नवाचार किया है, एक नया तोड़ निकाला है, जिसमें मेरठ के केंद्रीय विद्यालय के बच्चों को पहले विश्वास में लिया फिर उनका मनोबल बढ़ाया. उसके बाद एनसीआरटी की कक्षा 11 और बारहवीं की किताबों और उनके सभी अध्यायों को कॉमिक्स में परिवर्तित करने की योजना बनाई। जिसमे से   कक्षा ग्यारहवीं में 7 चैप्टर हैं जबकि कक्षा 12 वीं में 12 हैं।   इन सभी चैप्टर के कॉमिक्स बच्चों ने तैयार किए हैं।  इतना ही नहीं बच्चों ने न सिर्फ कॉमिक्स में इतिहास की घटनाओं को हूबहू वर्णित करते हुए न सिर्फ डायलॉग लिखे हैं, बल्कि उन समय काल की घंटनाओं को भी प्रदर्शित करते हुए  उनको कार्टून में हूबहू पिक्चर  और डिजाईन  भी किए हैं। 

   न सिर्फ इतिहास को पढ़ा बल्कि छात्रों ने उसे गढ़ा भी

 उन्होंने बताया कि इसका सबसे बड़ा फायदा दिए हुआ है कि बच्चों ने पहले इतिहास  को पढ़ा फिर लर्निग  किया फिर समझा और लिख दिया। इससे  न सिर्फ इतिहास को पढ़ा बल्कि इतिहास को गढ़ा भी, जिससे  इतिहास विषय पर मजबूत पकड़ हो गई। 

 कामिक्स   बनाकर किताब की हर छोटे बड़े चैप्टर को बना दिया दिलचस्प सीरीज

बच्चों ने जैसे सिंधु घाटी सभ्यता एक पाठ उनकी किताब में है कलाकृतियां हैं उन्हें भी बच्चों ने बनाया, उनकी मुहरें  भी पहले देखीं फिर उन्हें समझे और उसके बाद उन्हें भी उसी तरह से बनाया, जिससे बच्चों को अधिकतम जो जानकारी थी वह भी हो गई, वहीं कॉमिक्स में भी सहेज दिया. क्योंकि बच्चों को देखकर और लिखकर ज्यादा समझ आता है तो इस तरह से इतिहास को सहज और सरल तरीके में व्यक्त किया गया है।

अद्भुत हैं किताबें, छात्रों  में है क्रेज

अध्यापक निरुपम गुप्ता कहते हैं कि एनईपी और केंद्रीय विद्यालय नवाचार के मामले में आगे रहता है.।इससे बच्चों में अधिकतम  सर्वांगीण विकास किया जाता है। ऐसे में  आर्टिफिशियल इंटेलिजैंस, लेखन , कॉमिक  बनाना और अन्य विधाओं में ट्रेंड किया जाता है।

 बुद्धि विवेक और धैर्य से पाई सफलता

इतिहास की पुस्तकों में बच्चों ने अध्यायों  में अपनी तर्क क्षमता, काल्पनिक क्षमता को भी प्रयोग किया है। जिसमें छात्रों ने खुद को भी और अपने  इतिहास के अध्यापक  को भी  चित्रांकित किया है। इस प्रकार बच्चों ने जब इन किताबों के पाठ पढ़कर उन्हें नए ढंग से पेश किया तो उनकी इतिहास से संबंधित अपनी पुस्तक के सभी  प्रश्नों का उत्तर भी अब उन्हें भली भाँति उनके पास है।

 अनुठे प्रयोग से इतिहास पढना हुआ आसान

 इसी प्रकार इतिहास के एक चैप्टर विजयनगर साम्राज्य उसको समझने के लिए बच्चों ने कॉमिक्स में सबसे पहले एक टाईम मशीन बनाई और उसे अलग अलग कलाकृतियों के साथ खुद को भी एक दर्शक किरदार के रूप में रखते हुए वहां पहुंच जाते हैं और एक एक घटना को सिलसिलेवार ढंग से कॉमिक्स में उतार देते हैं।  शिक्षक निरुपम गुप्ता ने बताया कि इतिहास को समझने का इससे बेहतर और कोई तरीका नहीं हो सकता, इससे बच्चे आसानी से इस विषय को जान गए हैं और इतिहास भी उन्हें अच्छी तरह से याद हो गया है, जिसे वे कभी नहीं भूल सकेंगे।

डिजिटल फॉर्मैट में कनवर्ट  करने को की जा रहीं क़वायदे

फिलहाल अब इन इतिहास की पुस्तकों के तमाम पाठ्यक्रम को डिजिटल फॉर्म  में लाने की कोशिश की जा रही है जिससे कि बाकी  छात्रों को  भी इसका लाभ मिले और वे कॉमिक्स  की तरह इतिहास को गुदगुदाते हुए पढ़ सकें। जिससे कि बाकी भी विद्यार्थी जो भी इतिहास विषय में रूचि रखते हैं वे इसका फायदा उठा सकें, साथ है निश्चित ही यूपीएससी समेत प्रतियोगिता की तैयारी करने वाले छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। 


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