पैरा एथलीट खिलाडियों के लिए बन रहे प्रेरणा दायक
बेरली में आयोजित पैरा खिलाड़ियों ने बटोरे 45 पदक
मेरठ। कौन कहता है अपंगता किसी व्यक्ति के अभिषाप बन सकता है। इस बात को कैलाश प्रकाश स्पोर्टस स्टेडियम में पैरा एथलीट झुटला रहे है। अभी गत दिनाे बरेली में समाप्त प्रदेश स्तरीय पैरा चैंपियनशिप में मेरठ का झंडा बुंलद करते हुए एक दो नहीं वरन 45 पदक बटौरे।
स्टेडियम में प्रैक्टिस बरते हुए मिले कुछ एथलीट से बात करने का प्रयास किया। जिसमें पैरा एथलीट रिया सिंह ने बताया किकुछ साल पहले तक पैरा गेम्स को लेकर उन्हें कोई जानकारी ही नहीं थी। अब तक नेशनल स्तर पर मेडल ला चुकी हैं, एक इंटरनेशनल टूर पर भी जाकर परफॉर्म कर चुकी हैं। शॉटपुट उनका गेम है. बरेली में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता है। कई प्रतियोगिताओं में मेडल ला चुकी हैं।
अगला लक्ष्य एशियन गेम और ओलम्पिक में पदक लाना है, जिसके लिए प्रयास जारी हैं।पैरा एथलीट सलोनी जिन्होंने बरेली में आयोजित प्रतियोगिता मे अलग-अलग गेम में दो गोल्ड मेडल और एक ब्रॉन्ज अपने नाम किया । सलोनी ने 400 मीटर रेस, 1500 मीटर रेस में स्वर्ण पदक जीता था, वहीं शॉट पुट में सिल्वर मेडल जीता । उसने बताया पिता ड्राइवर हैं और मां हाउसवाइफ हैं। अगला लक्ष्य अब आगामी समय में होने वाली नेशनल प्रतियोगिता में पदक लाना है। पैरा एथलीट दीपिका पाल ने बताया कि उनका लक्ष्य स्पष्ट है कि उन्हें देश के लिए खेलना है और मेडल जीतना है. दीपिका पाल भी बीते दिनों हुई स्टेट लेवल पैरा चैंपियनशिप में तीन गोल्ड मेडल जीतकर लौटी हैं।। उन्होंने 100 मीटर दौड़, लॉन्ग जंप और शॉट पुट में अपने वर्ग में खेलते हुए तीन गोल्ड मेडल जीते हैं. वहीं नेशनल स्तर पर अब तक प्रदेश के अलग-अलग राज्यों में भी प्रतिभाग कर चुकी हैं, कई मेडल भी जीत चुकी हैं। बागपत के पालियान गांव निवासी उधम सिंह का कहना है किउनका एक ही सपना है, जिसके लिए निरंतर प्रयत्न कर रहे हैं। औसतन हर दिन लगभग 6 से 7 घंटे स्टेडियम में गुजारते हैं।



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