सनातन धर्म एवं करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का गंभीर अपमान- सुनील भराला 

जगद्गुरु शंकराचार्य  का रथयात्रा  को रोका अपमानजनक 

 मेरठ। प्रयाग राज में   जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वर सरस्वती महाराज की रथ यात्रा को प्रशासन द्वारा रोका जाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह सनातन धर्म एवं करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का गंभीर अपमान भी है। यह बयान  प. सुनील भराला का आया हे। 

 उनका कहना है कि रथ यात्राएं हमारी प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न अंग रही हैं, जिन्हें सदियों से समाज में आध्यात्मिक चेतना, एकता और नैतिक मूल्यों के प्रसार के लिए निकाला जाता रहा है।

 कहा स्वामी अविमुक्तेश्वर सरस्वती जी जैसे प्रतिष्ठित संत का संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज और धर्म की सेवा को समर्पित रहा है। उनकी रथ यात्रा का उद्देश्य किसी भी प्रकार का अव्यवस्था फैलाना नहीं, बल्कि धर्म, सद्भाव और संस्कारों का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। इसके बावजूद यदि कुछ अधिकारियों द्वारा बिना ठोस कारण के इस यात्रा को रोका गया, तो यह न केवल प्रशासनिक असंवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।मेरा मुख्यमंत्री जी से विनम्र आग्रह है कि निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जिन अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए यह निर्णय लिया है, उनके विरुद्ध उचित एवं कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाए कि सनातन धर्म की धार्मिक गतिविधियों के साथ ऐसा अन्याय दोबारा न हो।

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