मवाना शुगर वर्क्स कर टैक्स याचिका में नगर पालिका की  जीत

 हाईकोर्ट ने नगर पालिका के पक्ष में सुनाया फैसला 

मवाना शुगर वर्क्स को देना होगा  ₹1.37 करोड़ से अधिक का बकाया

 मेरठ। मवाना शुगर वर्क्स एवं नगर पालिका परिषद मवाना के बीच कर निर्धारण को लेकर उच्च न्यायालय में चल रहे वाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगर पालिका परिषद के पक्ष में फैसला सुनाया है। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में नगर पालिका परिषद ने मवाना शुगर वर्क्स पर ₹1,37,15,136 (एक करोड़ सैंतीस लाख पंद्रह हजार एक सौ छत्तीस रुपये) का पुराना कर निर्धारण करते हुए वसूली नोटिस जारी कर दिया है।

बुधवार को नगर पालिका परिषद परिसर में आयोजित प्रेसवार्ता में पालिकाध्यक्ष अखिल कौशिक ने बताया कि नगर पालिका द्वारा उच्च न्यायालय में दायर समादेश याचिका संख्या (टैक्स) 745/2014 (मवाना शुगर वर्क्स बनाम नगर पालिका परिषद मवाना व अन्य) तथा समादेश याचिका संख्या (टैक्स) 2222/2009 (मवाना शुगर वर्क्स बनाम उत्तर प्रदेश व अन्य) में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 12 दिसंबर 2014 को पारित आदेश के तहत वर्ष 2007-2012 एवं वर्ष 2013-2018 के कर निर्धारण को निरस्त करते हुए फ्रेश नोटिस जारी कर नियमानुसार पुनः कर निर्धारण के आदेश दिए गए थे।

पालिकाध्यक्ष ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर पालिका परिषद द्वारा मवाना शुगर वर्क्स से बकाया कर निर्धारण के संबंध में लगातार पत्राचार किया गया, किंतु लंबे समय तक कार्यवाही पूर्ण नहीं हो सकी। शुगर मिल की ओर से न्यायालय में कई दलीलें प्रस्तुत की गईं, लेकिन नगर पालिका की ओर से की गई सशक्त पैरवी एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने नगर पालिका परिषद के पक्ष में आदेश पारित किया।

उन्होंने बताया कि न्यायालय के निर्देशों के क्रम में मवाना शुगर वर्क्स द्वारा वर्ष 2018-19 से वर्ष 2025-26 तक स्वकर निर्धारण की कार्यवाही पूर्ण कराई गई, जिसके आधार पर बिल पास किया गया और ₹1,37,15,136 की धनराशि जमा कराई गई है।

इसके साथ ही मवाना शुगर वर्क्स पर वर्ष 2007-2012 तथा वर्ष 2012-2018 की पंचवर्षीय कर निर्धारण की शेष कार्यवाही भी पूर्ण की जानी है, जिसके लिए कर विभाग को कड़े निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में शुगर मिल के अधिकारियों से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

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