आरएसएस किसी दल का रिमोट नहीं - मोहन भागवत 

मोहन भागवत के बयान पर गरमाई सियासत; विपक्ष बोला- 'रिमोट संघ तो भाजपा है टीवी'

नई दिल्ली/नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  के सरसंघचालक मोहन भागवत के एक ताजा बयान ने देश के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मोहन भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ किसी भी राजनीतिक दल का 'रिमोट कंट्रोल' नहीं है। उनके इस बयान को भाजपा और संघ के बीच कथित दूरियों और विपक्षी हमलों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।

भाजपा को देखकर संघ का आकलन करना भूल: भागवत एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा, "भारतीय जनता पार्टी को देखकर आरएसएस के बारे में निष्कर्ष निकालने की कोशिश करना एक बड़ी भूल होगी। संघ किसी राजनीतिक दल का रिमोट कंट्रोल नहीं है, बल्कि यह शुद्ध रूप से समाज निर्माण का संगठन है।" उन्होंने आगे कहा कि संघ की स्थापना हिंदुओं को शांतिपूर्ण तरीके से संगठित करने के उद्देश्य से हुई थी और इसका लक्ष्य राष्ट्र की सेवा करना है, न कि सत्ता की राजनीति को निर्देशित करना।

विपक्ष का तीखा पलटवार: "रिमोट संघ, तो भाजपा है टीवी" मोहन भागवत के इस बयान पर विपक्षी दलों ने तत्काल मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि अगर आरएसएस रिमोट है, तो भाजपा उस टीवी की तरह है जिसका चैनल संघ ही बदलता है। विपक्षी खेमे का दावा है कि भागवत का यह बयान इस बात का प्रमाण है कि अब आरएसएस और भाजपा के बीच सब कुछ ठीक नहीं है और दोनों संगठनों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं।

सियासी गलियारों में चर्चा तेज: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई मुद्दों पर संघ और सरकार के बीच वैचारिक भिन्नता की खबरें आती रही हैं। विपक्ष इसे भाजपा की कमजोरी के रूप में पेश कर रहा है, जबकि संघ समर्थकों का कहना है कि सरसंघचालक ने केवल संघ की स्वायत्तता और उसके मूल उद्देश्यों को स्पष्ट किया है।

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