सराहनीय पहल
 इलमा अज़ीम 
भारत में भी कुछ शैक्षणिक संस्थानों, विशेषकर स्कूलों में, जंक फूड ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है, जो एक सराहनीय पहल है। आज पूरी दुनिया में फास्ट फूड और अत्यधिक चीनी, नमक व वसा युक्त खाद्य पदार्थों को स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन बार-बार चेतावनी दे चुका है कि असंतुलित आहार और बिगड़ती जीवनशैली आने वाले समय में गैर-संचारी रोगों को एक महामारी का रूप दे सकती है।
 ऐसे में यह विचार करना आवश्यक हो जाता है कि क्या आजीविका सृजन के नाम पर ऐसे खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देना उचित है, जिनका सीधा प्रभाव समाज के स्वास्थ्य पर नकारात्मक रूप से पड़ता है। भारत जैसे देश में, जहां एक ओर कुपोषण और अल्पपोषण आज भी बड़ी समस्या है, वहीं दूसरी ओर मोटापे का तेजी से बढऩा यह दर्शाता है कि हमारा खानपान किस तरह असंतुलित होता जा रहा है। 
बच्चों में बढ़ता मोटापा भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है। दुनिया के कई देशों ने इस समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। भारत में भी कुछ शैक्षणिक संस्थानों, विशेषकर स्कूलों में, जंक फूड ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है, जो एक सराहनीय पहल है।

 किंतु दुर्भाग्यवश अधिकतर स्कूलों में इस विषय पर दोहरा मापदंड देखने को मिलता है। रोजमर्रा के दिनों में बच्चों को जंक फूड से दूर रहने की सीख दी जाती है, जबकि वार्षिक समारोहों और मेलों के दौरान उन्हीं स्कूल परिसरों में फास्ट फूड के स्टॉल लगाए जाते हैं। यह विरोधाभास बच्चों के मन में भ्रम पैदा करता है।

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