रंगदारी मामले में पुलिस खुलासे पर खड़े हुए सवाल
द गुरुकुलम स्कूल के संचालक मामले में अफसरों से मिले, बोले- मैं ही टारगेट क्यों
मेरठ। द गुरुकुलम इंटरनेशनल स्कूल के संचालक कंवलजीत सिंह को ईमेल भेजकर मांगी गई रंगदारी के मामले में पुलिस एक आरोपी को जेल भेजकर पीठ थपथपा चुकी है लेकिन हकीकत यह है कि पीड़ित पुलिस के इस खुलासे से संतुष्ट ही नहीं है।कंवलजीत का कहना है कि शहर में स्कूलों की भरमार है, फिर केवल उनको ही यह धमकी भरा ईमेल क्यों भेजा गया?
बता दें G-113 शास्त्री नगर में कवलजीत सिंह का द गुरुकुलम इंटरनेशनल स्कूल है। 10 दिसंबर, 2025 को उनकी ईमेल आईडी पर धमकी भरे तीन मेल भेज कर 10 लाख रुपए की रंगदारी मांगी गई थी।रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई थी। कवलजीत सिंह राजनीतिक दल राष्ट्रीय लोकदल से भी जुड़े हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें सुरक्षा दी गई थी।
पुलिस ने मामले में यह किया था खुलासा
नौचंदी पुलिस ने एक सप्ताह बाद ही हरियाणा से एक पिकअप चालक सनी उर्फ़ सन्नी को गिरफ्तार कर इस पूरे मामले का खुलासा किया था। सनी के बैंक खाते का रंगदारी की रकम मांगने के लिए प्रयोग किया था।यह भी बताया कि सनी उर्फ सन्नी इससे पूर्व भी पानीपत के एक स्कूल संचालक से इसी तरह रंगदारी मांग चुका है। मानसिक रूप से अस्वस्थ भी बताया गया था।संचालक कवलजीत को पुलिस से सुरक्षा मिली हुई है लेकिन वह अभी भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कैंट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सुनील वाधवा के साथ वह गुरुवार सुबह पहले डीआईजीऔर उसके बाद एसएसपीर ऑफिस पहुंचे। हालांकि एसएसपी से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई।
मैं ही टारगेट क्यों?
सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी से वह मिले और खुलासे पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शहर में प्रतिष्ठित स्कूलों की भरमार है। उनका स्कूल रैंक के हिसाब से काफी पीछे है। फिर केवल उनको ही यह मेल क्यों भेजा गया?सबसे बड़ी बात उनका ईमेल आरोपी के पास कहां से आया? जो भाषा शैली थी वह प्रोफेशनल अपराधियों की तरह थी। आखिर पुलिस मामले से पल्ला क्यों झाड़ रही है।
वाधवा बोले- मेरठ लिंक के बिना संभव नहीं
कैंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष सुनील वाधवा ने कहा कि हरियाणा में बैठा व्यक्ति यह क्यों करेगा। हो ना हो मेरठ से इसका कोई ना कोई लिंक है। पुलिस को चाहिए कि वह उस लिंक को सार्वजनिक करे। एक महीना बीत गया है लेकिन पुलिस अधूरा खुलासा कर शांत बैठ चुकी है और पीड़ित डर के साए में जीने को मजबूर है।


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