प्रियंका गांधी को पीएम चेहरा बनाने की मांग पर गरमाई सियासत
कांग्रेस के 'दावे' पर भाजपा का करारा पलटवार
नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर 'नेतृत्व' को लेकर बहस छिड़ गई है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा प्रियंका गांधी वाड्रा को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने की वकालत के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जहाँ कांग्रेस कार्यकर्ता उनमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की छवि देख रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इसे 'परिवारवाद' का अगला अध्याय करार दिया है।
इंदिरा गांधी से तुलना और पीएम पद की मांग
कांग्रेस के भीतर लंबे समय से यह स्वर उठते रहे हैं कि प्रियंका गांधी में वह करिश्मा है जो पार्टी को फिर से सत्ता के शिखर तक पहुँचा सकता है। हाल ही में कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक मंचों से यह बयान दिया है कि यदि भविष्य में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो उसका नेतृत्व प्रियंका गांधी को करना चाहिए। समर्थकों का तर्क है कि प्रियंका की कार्यशैली और जनता से जुड़ने का अंदाज हुबहू इंदिरा गांधी जैसा है, जिससे पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।
भाजपा का तीखा तंज:
"मुंगेरीलाल के हसीन सपने" कांग्रेस की इस मांग पर भाजपा नेताओं ने बेहद आक्रामक अंदाज में जवाब दिया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि कांग्रेस 'राहुल बनाम प्रियंका' के चक्रव्यूह में फंसी हुई है और देश की जनता अब परिवारवाद को पूरी तरह नकार चुकी है। भाजपा नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का पद किसी परिवार की विरासत नहीं है, बल्कि यह देश की जनता के विश्वास का प्रतीक है। भाजपा ने इसे कांग्रेस का 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' करार दिया है।
अस्तित्व की लड़ाई या रणनीतिक बदलाव?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी को आगे रखने की मांग दरअसल पार्टी के भीतर एक बड़े बदलाव का संकेत हो सकती है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर कांग्रेस अभी भी सामूहिक नेतृत्व की बात कर रही है, लेकिन नेताओं के निजी बयानों ने भाजपा को हमला करने का नया मौका दे दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस आगामी चुनावों में इस 'चेहरे' के सहारे कोई बड़ा उलटफेर कर पाएगी या यह केवल एक आंतरिक चर्चा तक ही सीमित रहेगा।


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