संतों का अपमान बना सियासी मुद्दा

राजीव त्यागी 

माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से रोके जाने का विवाद अब सियासी मुद्दा बनता जा रहा है। इसे लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साझना शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सनातन धर्म की परंपरा तोड़ने का काम कर रही है। सरकार जानबूझकर संतों और ऋषियों का अपमान कर रही है। 



उन्होंने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और अन्य संत गौरव का विषय हैं और प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान भक्तों का उनसे मिलने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए एकत्रित होना स्वाभाविक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रथा सनातन धर्म का अभिन्न अंग है। भाजपा को अपने अधिकारियों के माध्यम से इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए था। उन्होंने आगे दावा किया कि भाजपा संविधान, कानून के शासन और भाईचारे और संस्कृति के मूल्यों को बनाए रखने में विफल रही है, जो उनके अनुसार देश की पहचान हैं। इस बीच, 18 जनवरी को प्रयागराज के अधिकारियों ने इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बिना पूर्व अनुमति के आए थे और उन्होंने स्थापित परंपराओं का उल्लंघन किया था। 



प्रयागराज मंडल की संभागीय आयुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि संगम पर भारी भीड़ के बावजूद शंकराचार्य लगभग 200 अनुयायियों के साथ रथ यात्रा पर आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अनुयायियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और वापसी मार्ग को लगभग तीन घंटे तक अवरुद्ध रखा, जिससे आम श्रद्धालुओं को असुविधा हुई और सुरक्षा का गंभीर खतरा पैदा हो गया। बहरहाल अब इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर सुरू हो गया है। उधर, शंकराचार्य ने भी अधिकारियों के नोटिस का तगड़ा जवाब देकर अपनी स्थिति साफ करने का प्रयास किया है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts