सरधना के कपसाड़ गांव में तनाव बरकरार, बीमार हुई रूबी

 गांव बना 'नो-एंट्री जोन', 26 जनवरी तक बाहरी लोगों के आने पर पाबंदी

कपसाड़ व ज्वालागढ में लगी धारा 163 

मेरठ। सरधना का कपसाड़ गांव के ग्रामीण इन दिनों जातीय तनाव और गम के साये में जी रहे हैं। अपनी मां की हत्या का खौफनाक मंजर देख चुकी और अपहरण का शिकार हुई रूबी की तबीयत मंगलवार रात अचानक बिगड़ गई। गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक होने के कारण परिजनों में बेचैनी बढ़ गई, जिसके बाद प्रशासन ने आनन-फानन में मेडिकल टीम को रूबी के घर भेजा।

घर की दहलीज पर पहुंचा अस्पताल सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने बताया कि रूबी की तबीयत खराब होने की सूचना मिलते ही सरधना सीएचसी से डॉक्टरों की एक टीम उसके घर पहुंची। रूबी ने पेट में तेज दर्द और घबराहट की शिकायत की थी। डॉक्टरों ने घर पर ही उसका मेडिकल चेकअप किया और दवाएं दीं। फिलहाल उसकी स्थिति में सुधार है, लेकिन वह अभी भी गहरे सदमे में है।

जातीय संघर्ष के डर से धारा 163 लागू 

8 जनवरी को हुए इस कांड के बाद से ही गांव में राजपूत और अन्य समाज के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। आरोपी पारस द्वारा रूबी की मां की हत्या किए जाने के बाद से ही विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का जमावड़ा लगा हुआ था। प्रशासन ने किसी भी संभावित संघर्ष को रोकने के लिए गांव में धारा 163 (पुरानी धारा 144) लगा दी है। आदेश के अनुसार, अब किसी भी बाहरी व्यक्ति, राजनीतिक दल या संगठन को गांव में घुसने की अनुमति नहीं होगी। केवल आवश्यक सेवाओं (मेडिकल, बिजली, डाक) को ही छूट दी गई है।

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